
Flydubai: आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के कॉकपिट में अचानक हुई हिंसक घटना ने एविएशन सिक्योरिटी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित माछर पर उनके ओमानी को-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद माछर ने विमान को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिरकार फ्लाइट को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।
घटना के बाद स्मित माछर को सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस घटना ने विमान में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कॉकपिट में प्रतिबंधित वस्तुओं तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
34 हजार फीट से 16 हजार फीट तक नीचे आया विमान
घटना उस समय हुई जब विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। कॉकपिट में हुए संघर्ष के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से घटकर करीब 16 हजार फीट तक पहुंच गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलटों की ओर से 7500 कोड भेजा गया। विमानन क्षेत्र में यह कोड विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप या हाईजैक जैसी गंभीर स्थिति का संकेत देता है। इसके बाद इलाके में मौजूद लड़ाकू विमानों को भी अलर्ट किया गया।
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी को-पायलट विमान को हाईजैक कर उसे दुर्घटनाग्रस्त कराने की कोशिश कर रहा था। हालांकि घटना की अंतिम वजह और आरोपी की मंशा की जांच अभी जारी है।
घायल होने के बाद भी कॉकपिट नहीं छोड़ा
हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित माछर ने स्थिति को संभालने की कोशिश जारी रखी। घटना के दौरान उन्होंने हमलावर का मुकाबला किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिससे विमान में मौजूद अन्य लोगों को हमलावर पर काबू पाने का मौका मिला।
एक यात्री के मुताबिक, स्मित ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की और इसके बाद विमान के नियंत्रण को संभालने में योगदान दिया। रिपोर्टों के अनुसार, बेहोश होने से पहले उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा अनलॉक किया था।
विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट ने घायल कैप्टन को प्राथमिक उपचार दिया। यात्रियों और क्रू के साथ ड्यूटी से बाहर यात्रा कर रहे कुछ पायलटों ने भी आरोपी को-पायलट को काबू करने में मदद की।
तबूक में सुरक्षित उतरी फ्लाइट
कॉकपिट में हुई इस घटना के बावजूद विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतार लिया गया। घटना के बाद आरोपी को-पायलट को सऊदी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ की जा रही है।
इजरायल की ओर से मामले की जांच संभावित आतंकी घटना के एंगल से भी की जा रही है। वहीं फ्लाईदुबई ने कहा है कि हमले के पीछे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कौन हैं कैप्टन स्मित माछर?
स्मित माछर की उम्र 39 साल बताई गई है और वह दो बच्चों के पिता हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह मुंबई से ताल्लुक रखते हैं और पिछले करीब 15 वर्षों से विमान उड़ाने का अनुभव रखते हैं।
उन्होंने 2022 में फ्लाईदुबई ज्वाइन करने से पहले स्पाइसजेट में काम किया था। उनके पास करीब 9,750 घंटे का उड़ान अनुभव बताया गया है। अपने करियर के दौरान वह बोइंग 737 के विभिन्न मॉडल उड़ा चुके हैं और नए पायलटों को प्रशिक्षण देने का अनुभव भी रखते हैं।
अस्पताल में कैसी है हालत?
घटना के बाद स्मित माछर को सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनकी सर्जरी की गई और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने भी मामले पर नजर बनाए रखी है। दूतावास के अधिकारियों के मुताबिक वे स्मित के परिवार के संपर्क में हैं और सऊदी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। फ्लाईदुबई भी उनके परिवार और यूएई में मौजूद भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है।
दुनिया भर में हुई बहादुरी की चर्चा
घटना के बाद स्मित माछर की भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनकी बहादुरी की सराहना की। अमेरिकी अधिकारियों और अन्य लोगों ने भी उनकी भूमिका को लेकर प्रतिक्रिया दी है।
इजरायली विदेश मंत्रालय ने घटना के संदर्भ में भारतीय, इजरायली और अमीराती लोगों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सामूहिक कार्रवाई से बड़ी त्रासदी टली।
भारत में भी स्मित माछर की बहादुरी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
आखिर कॉकपिट में चाकू पहुंचा कैसे?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक को-पायलट चाकू लेकर कॉकपिट तक कैसे पहुंचा। सामान्य तौर पर विमान में हथियार और धारदार वस्तुओं को लेकर कड़े सुरक्षा नियम होते हैं। हालांकि पायलटों और क्रू के लिए सुरक्षा प्रक्रियाएं यात्रियों से अलग हो सकती हैं।
इसी वजह से घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि कॉकपिट में मौजूद सामान और क्रू की सुरक्षा जांच के नियमों की समीक्षा की जरूरत है या नहीं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू विमान में कहां से आया और उसे कॉकपिट तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं।
एविएशन सिक्योरिटी के सामने नया सवाल
9/11 के बाद विमान के कॉकपिट की सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया था। कॉकपिट के दरवाजों को इस तरह डिजाइन किया गया कि बाहर से किसी व्यक्ति के लिए वहां पहुंचना बेहद मुश्किल हो। लेकिन FZ1073 की घटना में कथित खतरा कॉकपिट के अंदर मौजूद क्रू सदस्य से ही आया।
इस वजह से एविएशन विशेषज्ञ अब केवल कॉकपिट के बाहर से होने वाले खतरे के बजाय अंदरूनी सुरक्षा जोखिमों पर भी चर्चा कर रहे हैं। पायलटों की पृष्ठभूमि जांच, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रक्रियाएं और कॉकपिट में ले जाए जाने वाले सामान की निगरानी जैसे मुद्दे जांच के केंद्र में आ सकते हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
विमान के किसी क्रू सदस्य द्वारा जानबूझकर विमान को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। 2015 में जर्मनविंग्स के एक को-पायलट ने विमान को जानबूझकर पहाड़ों से टकरा दिया था। इस हादसे में 150 लोगों की मौत हुई थी।
उस घटना के बाद कई देशों और एयरलाइंस ने कॉकपिट में कम से कम दो लोगों की मौजूदगी जैसे सुरक्षा नियमों पर जोर दिया। हालांकि FZ1073 की घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि केवल दो लोगों की मौजूदगी का नियम पर्याप्त है या सुरक्षा के दूसरे पहलुओं की भी समीक्षा जरूरी है।
भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए भी अहम घटना
खाड़ी क्षेत्र की एयरलाइंस में बड़ी संख्या में भारतीय पायलट और केबिन क्रू काम करते हैं। ऐसे में स्मित माछर से जुड़ी घटना भारतीय एविएशन समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल जांच एजेंसियां हमले की पूरी परिस्थितियों, आरोपी की मंशा और कॉकपिट में चाकू पहुंचने के तरीके की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन बदलावों की जरूरत होगी।
written by Siddhi Srivastava



