Yogi Adityanath: CM योगी ने 16 मई 2014 को बताया भारत के इतिहास का अहम दिन, PM मोदी के कार्यकाल से जोड़ा संबंध

Yogi Adityanath: सीएम योगी ने 16 मई 2014 को बताया अहम तारीख, 2047 के विकसित भारत में युवाओं की भूमिका पर दिया जोर।

Yogi Adityanat:  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 मई 2014 को देश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण तारीख बताते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से जोड़ा। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन देश में करीब तीन दशक बाद किसी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद देश में कई महत्वपूर्ण सुधारों की प्रक्रिया आगे बढ़ी और पुराने तथा गैरजरूरी कानूनों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए। उन्होंने अपने संबोधन में विकसित भारत के लक्ष्य, कानून के शासन और विद्यार्थियों की भविष्य की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की।

यूपी की कानून व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने रखी बात

दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कानून का शासन स्थापित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि उस समय गुंडाराज और माफिया का प्रभाव था, जबकि मौजूदा सरकार में माफिया के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार और अपराध पर नियंत्रण सुशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं। उनके मुताबिक, शासन व्यवस्था में कानून का पालन सुनिश्चित करना और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

1500 से अधिक पुराने कानून खत्म करने का किया जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की ओर से किए गए कानूनी और संवैधानिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 1500 से अधिक पुराने और गैरजरूरी कानूनों को समाप्त किया गया।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने इन कदमों को देश में हुए महत्वपूर्ण बदलावों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

2047 में देश की जिम्मेदारी संभालेंगे आज के विद्यार्थी

मुख्यमंत्री ने कानून की पढ़ाई पूरी कर रहे विद्यार्थियों को भविष्य की जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2047 को देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे। उस समय आज के विद्यार्थी न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई विद्यार्थी न्यायाधीश बनेगा, कोई वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में काम करेगा, तो कोई शासन-प्रशासन में योगदान दे सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों को अभी से अपने ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाना चाहिए, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।

सत्य, धर्म और निरंतर अध्ययन को बताया वकील का आधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भावी अधिवक्ताओं को उनके पेशे की जिम्मेदारियां समझाते हुए कहा कि वकील के जीवन में सत्य बोलना, धर्म का पालन करना और लगातार अध्ययन करते रहना बेहद जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि कानून का क्षेत्र निरंतर सीखने और बदलती परिस्थितियों को समझने की मांग करता है। एक अच्छे अधिवक्ता के लिए कानूनी ज्ञान के साथ नैतिकता, अनुशासन और अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।

शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन अपनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भगवान शिव, श्रीकृष्ण और भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिव जैसा मस्तिष्क व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने श्रीकृष्ण के आदर्शों को गरीबों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता से जोड़ा। वहीं, भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने मर्यादा का पालन करने और अपनी बात पर कायम रहने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने पेशेवर जीवन में इन मूल्यों को अपनाएं और न्याय, सत्य तथा सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें।

written by Siddhi Srivastava

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