
CJP leaders: तिहाड़ जेल से हाल ही में बाहर आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जंतर-मंतर पर हुए हाई-प्रोफाइल प्रदर्शन और उससे जुड़े कानूनी मामलों में CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे पर शिकंजा कसता जा रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक, आज इन तीनों नेताओं को दिल्ली की विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत में दोपहर तीन बजे पेश होना है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भी इस मामले में अपनी जांच को तेज करते हुए इनसे कड़ाई से पूछताछ करने की तैयारी में जुटी हुई है।
आइए जानते हैं इस पूरे सनसनीखेज प्रकरण की 5 सबसे बड़ी और अहम बातें, जिन्हें विस्तार से समझना जरूरी है:
1. कोर्ट में पेशी का तय समय और निर्देश:
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अदालत के पिछले आदेश और तय समय के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीनों प्रमुख नेताओं—सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे—को आज दोपहर ठीक तीन बजे दिल्ली की विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत के समक्ष पेश होना होगा, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
2. क्राइम ब्रांच के शिकंजे में पूछताछ:
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दिल्ली पुलिस ने इस पूरे संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच विशेष रूप से क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। हालांकि गुरुवार को तय समय पर नेताओं के पेश न होने के बाद, पुलिस अधिकारियों ने आज सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच किसी भी समय अपने कार्यालय में उपस्थित होकर जांच में शामिल होने का सख्त निर्देश दिया है।
3. आखिर क्या है पूरा विवाद और मामला?:
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यह पूरा कानूनी विवाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल को प्रशासन द्वारा अधिसूचित सूची से हटाए जाने के बाद भी वहां कथित तौर पर बलपूर्वक घुसने, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के सरकारी काम में भारी बाधा डालने और प्रशासनिक आदेशों की सरेआम अवहेलना करने से जुड़ा हुआ है।
4. कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में गंभीर धाराओं में FIR:
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दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस थानों में CJP नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई अति-गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें लोक सेवक के आदेश की अवहेलना, गृह-अतिचार, सरकारी काम में स्वेच्छा से बाधा डालना, लोक सेवक पर हमला करना और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
5. हाल ही में तिहाड़ जेल से हुई थी रिहाई:
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उल्लेखनीय है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बैरिकेड से घिरे प्रदर्शन स्थल के गेट पर चढ़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 21 अक्टूबर को उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था, लेकिन बाहर आते ही उनके लिए कानूनी संकट फिर से गहरा गया है।
written by Siddhi Srivastava



