
Census 2027: जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को भी जनगणना के लिए गणनाकर्मी नियुक्त किया जा सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 18(1) के तहत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है।
इस संशोधन के बाद जनगणना कार्यों के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता का दायरा बढ़ेगा। अब सरकारी शिक्षकों और अधिकारियों के अलावा निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी इस जिम्मेदारी में शामिल किया जा सकेगा।
किन कर्मचारियों की लगाई जा सकेगी ड्यूटी?
संशोधित नियमों के अनुसार, राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन जनगणना कार्यों के लिए विभिन्न संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेंगे। इनमें सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक भी शामिल हैं।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत क्लर्क और अधिकारी भी गणनाकर्मी बनाए जा सकते हैं। बैंकों, कंपनियों, वैधानिक निकायों, संस्थानों, सोसाइटियों और ट्रस्टों के कर्मचारियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का प्रावधान है। संबंधित प्रशासन जरूरत के अनुसार किसी अन्य उपयुक्त व्यक्ति को भी नियुक्त कर सकता है।
जनगणना ड्यूटी पर क्यों उठा था विवाद?
निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने का मामला हरियाणा में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच गया था। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस ने गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य में नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि जनगणना अधिनियम, 1948 और उसके तहत बनाए गए नियमों में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को गणनाकर्मी या पर्यवेक्षक नियुक्त करने का स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। याचिका में अधिनियम की धारा 4A का हवाला देते हुए स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने संबंधी प्रावधान पर भी सवाल उठाए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर को जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा में जनगणना ड्यूटी के लिए शिक्षकों का विवरण मांगने वाले दो सरकारी पत्रों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को निर्धारित बताई गई है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अब नियमों में संशोधन किए जाने से इस विषय का कानूनी संदर्भ बदल गया है। अदालत में लंबित मामले पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह न्यायिक कार्यवाही और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगा।
दो चरणों में होगी जनगणना
भारत में वर्ष 2027 की जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास से संबंधित जानकारी जुटाने का काम होगा। दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी।
जनगणना देश की आबादी, सामाजिक संरचना और आवासीय परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराती है। इन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और नीतिगत निर्णयों की योजना बनाने में किया जाता है।
आजादी के बाद यह भारत की आठवीं जनगणना होगी। जनगणना हर दस साल में आयोजित की जाती है, लेकिन वर्ष 2021 में प्रस्तावित प्रक्रिया कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। अब 2027 की जनगणना के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज की जा रही हैं।



