
68500 Teachers Recruitment News:68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण विसंगति के मामले को लेकर पिछले 63 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में अनवरत धरना-प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आक्रोश सोमवार को उस समय सड़कों पर दिखाई दिया, जब सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। पिछले दो महीनों से अनवरत धरने पर बैठे और सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर आरक्षण विसंगति दूर करने, संशोधित परिणाम जारी करने तथा पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी विधानसभा के सामने सड़क पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। बाद में पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाकर बसों में भरकर ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक एवं झड़प भी हुई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 68,500 शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को समान अर्हता मानकों पर रखकर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि ओबीसी वर्ग को नियमानुसार आरक्षित श्रेणी का लाभ मिलना चाहिए था। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बेसिक शिक्षा नियमावली, उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली, एनसीटीई की गाइडलाइन तथा शासन द्वारा जारी विभिन्न आदेशों की अनदेखी की गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में ओबीसी अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए।
इस प्रकरण को लेकर अभ्यर्थियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, लखनऊ, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली तथा विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष अपनी शिकायतें एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभ्यर्थियों के अनुसार इन संवैधानिक संस्थाओं द्वारा मामले में उनके पक्ष में संस्तुतियां एवं आदेश जारी किए गए हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति में ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी मानते हुए भर्ती का परिणाम संशोधित करने तथा 150 अंकों में 60 अंक अर्थात 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों के परिणाम पर पुनर्विचार कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच, दोषियों को चिह्नित करने तथा नियमानुसार कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
10 सितंबर की बेसिक शिक्षा मंत्री की बैठक में भी उठा था मामला
धरने का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि विगत 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे। बैठक में भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी का लाभ नहीं मिलने से संबंधित विषय पर विस्तार से चर्चा हुई थी। तूफान सिंह के अनुसार बैठक में यह बात सामने आई थी कि प्रकरण में राज्य एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों और संस्तुतियों के अनुपालन का विषय गंभीर है।
उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान अभ्यर्थियों ने अधिकारियों एवं मंत्रियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि आरक्षण विसंगति की जांच कराकर अभिलेखों के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिया जा सकता है। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री की ओर से अभ्यर्थियों की मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने तथा शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि पिछड़े वर्गों के हक और अधिकारों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सदैव प्रतिबद्ध है। लेकिन बैठक के बाद भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया, जिससे अभ्यर्थियों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
‘दस्तक दो अभियान’ के तहत मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर लगाई गुहार
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता तूफान सिंह ने बताया कि पिछले 63 दिनों के दौरान अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के जनप्रतिनिधियों से लगातार मुलाकात कर न्याय की मांग की है। ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत अभ्यर्थी क्रमवार उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, अनिल कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों के आवास एवं कार्यालयों पर पहुंचे।
अभ्यर्थियों ने सभी जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर भर्ती में हुई आरक्षण विसंगति के दस्तावेज प्रस्तुत किए। कई नेताओं ने उनकी बात सुनी और उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि अब तक उन्हें आश्वासन के अतिरिक्त कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है। लगातार 63 दिनों तक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद न्याय नहीं मिलने के कारण उन्हें विधानसभा के सामने प्रदर्शन करने के लिए विवश होना पड़ा।
सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों की बिगड़ रही स्थिति
धरने में सहयोगी नेतृत्वकर्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि अभ्यर्थी पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसके बावजूद शासन और विभाग की ओर से उनकी मांगों पर कोई निर्णायक पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के सामने अब धैर्य की भी परीक्षा हो रही है। सरकार को अभ्यर्थियों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वार्ता और निर्णय की पहल करनी चाहिए।
महिला अभ्यर्थियों ने भी विधानसभा के सामने उठाई आवाज
महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि पिछले 63 दिनों से प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए अभ्यर्थी ईको गार्डन में संघर्ष कर रहे हैं। एक महिला अभ्यर्थी होने के नाते धरना स्थल पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन न्याय की उम्मीद में सभी अभ्यर्थी डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस विधान परिषद की समिति के समक्ष यह मामला पहुंचा और जहां से अभ्यर्थियों के पक्ष में संस्तुति एवं आदेश जारी हुए, उसी शासन व्यवस्था से अब न्याय की अपेक्षा है। हमारी मांग है कि विधानसभा और सरकार हमारी आवाज सुने तथा पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार प्रदान करे।
पुलिस कार्रवाई के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस प्रशासन द्वारा जबरन हटाए जाने और बसों में भरकर ईको गार्डन भेजे जाने के बाद भी अभ्यर्थियों का आक्रोश कम नहीं हुआ। प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थियों और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक हुई। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि वे किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक एवं आरक्षण संबंधी अधिकारों तथा वर्षों से लंबित नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों और संस्तुतियों का परीक्षण कर उनका नियमानुसार अनुपालन कराया जाए। ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक अर्थात 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर संशोधित परिणाम जारी किया जाए। पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए तथा आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर शासन स्तर से कोई ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
विधानसभा के सामने हुए इस प्रदर्शन में सचिदानंद, रामप्रवेश, विनोद प्रजापति, गायत्री जायसवाल, संतोष, इकबाल, नसीम, दीपक पटेल, उत्कर्ष वर्मा, संजीव, मनोज, अमित, भूपेन्द्र, अरविंद, अजीत, इशिता पाल, गरिमा, प्रतिमा कुशवाहा, गोस्वामी सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।
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