
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दीपावली शिल्प मेले में गुरुवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लोकगीत, शास्त्रीय गायन और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. स्वतंत्र शर्मा, पूर्व कुलपति, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर (मध्य प्रदेश), संस्कार भारती, काशी प्रांत के संगठन मंत्री दीपक शर्मा और सलाहकार कल्पना सहाय एवं विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. पंडित प्रेम कुमार मलिक ने दीप प्रज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत ब्रह्मनाद प्रतियोगिता में शास्त्रीय संगीत में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले साकेत कुमार एवं उनके दल के ध्रुपद गायन से हुई। कलाकारों ने राग का विस्तार, आलाप, नोम-तोम और लयकारी की प्रस्तुति देकर शास्त्रीय संगीत की सुंदरता से परिचित कराया।
इसके बाद डॉ. ज्योति मिश्रा ने उपशास्त्रीय गायन से समां बांध दिया। उन्होंने राग जोगकौंस में ‘आए बिराजो’, राग यमन में ‘गुरु बिन कौन’, ‘नंद घर बाजे कहन लागे मोहन’ और निर्गुण भजन ‘मोरी आई गवनवा की बारी’ प्रस्तुत किया। उनकी गायकी को दर्शकों ने खूब सराहा।
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की झलक गीता सिराड़ी एवं राजेन्द्र सिराड़ी के छपेली नृत्य में देखने को मिली। वहीं विनोद कुमार पटेल और उनके साथी कलाकारों ने बिरहा गायन के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लोकधुनों और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। मध्य प्रदेश से आए राजमणि तिवारी एवं दल ने दुलदुल घोड़ी की प्रस्तुति दी।
इस अवसर उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्र व पौधा भेंट कर सम्मानित किया।। कार्यक्रम का संचालन अभिजीत मिश्रा ने किया।
रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी



