
US Midterm Elections 2026: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी प्रचार अभियान के जरिए एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। ओबामा ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों, कनाडा पर लगाए गए टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध को लेकर आलोचना की, जबकि ट्रंप ने ओबामा के चुनाव प्रचार में उतरने पर तंज कसा।
इस चुनाव में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों का समीकरण दांव पर है। ऐसे में दोनों दलों के प्रमुख नेता मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए मैदान में उतर रहे हैं। बढ़ती महंगाई और आम लोगों की खर्च उठाने की क्षमता भी चुनावी बहस के अहम मुद्दे बने हुए हैं।
ओबामा ने जॉर्जिया में शुरू किया प्रचार
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जॉन ओसॉफ के समर्थन में प्रचार शुरू किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना की और कनाडा पर टैरिफ लगाने के फैसले पर सवाल उठाए।
ओबामा ने कनाडा के मशहूर मेपल सिरप और अभिनेता मार्टिन शॉर्ट का जिक्र करते हुए व्यंग्य भी किया। उन्होंने कनाडा के लोगों के मिलनसार स्वभाव की तारीफ करते हुए टैरिफ नीति पर अपनी असहमति जताई।
ईरान के साथ संघर्ष को लेकर भी ओबामा ने ट्रंप प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त नहीं हुआ है और अभी भी जारी है। इस बयान के जरिए उन्होंने विदेश नीति को लेकर मौजूदा प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठाए।
ट्रंप ने ओबामा पर कसा तंज
ओबामा के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उन पर निशाना साधा। ओहायो में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि जब भी ओबामा उनके खिलाफ प्रचार करने आते हैं, तब उनकी जीत पक्की हो जाती है।
ट्रंप की यह टिप्पणी चुनावी माहौल में दोनों नेताओं के बीच जारी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाती है। ओबामा डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं, जबकि ट्रंप रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं।
हैमबर्गर की कीमत का जिक्र कर महंगाई पर मजाक
चुनावी रैली में ट्रंप ने आम लोगों की खर्च उठाने की क्षमता यानी अफोर्डेबिलिटी के मुद्दे पर भी मजाक किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका में 5,000 डॉलर से क्या खरीदा जा सकता है। इसके बाद अपने आलीशान मार-ए-लागो रिसॉर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक हैमबर्गर पर ही इतनी रकम खर्च हो सकती है।
रैली में मौजूद लोगों ने उनकी इस टिप्पणी पर हंसी और तालियों से प्रतिक्रिया दी। हालांकि, महंगाई और रोजमर्रा के खर्च का मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
ट्रंप की इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस इसलिए भी अहम है, क्योंकि विपक्ष महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठा रहा है। चुनाव में इन मुद्दों का कितना प्रभाव पड़ेगा, यह मतदाताओं के रुख और चुनाव परिणामों से स्पष्ट होगा।
चुनाव जीतने पर 5,000 डॉलर देने की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव में जीत मिलने पर प्रत्येक अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर देने की बात कही थी। वहीं, कारोबारी एलन मस्क ने भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करते हुए कुछ अमेरिकियों को अपनी कंपनी स्पेसएक्स में शेयर देने की बात कही है।
हालांकि, ऐसी घोषणाओं और बयानों की वास्तविक स्थिति, पात्रता तथा लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। चुनावी प्रचार में किए गए वादों को लागू हो चुकी सरकारी योजनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
महंगाई बनी चुनावी बहस का प्रमुख मुद्दा
अमेरिका में बढ़ती कीमतें और घरेलू खर्च चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। विपक्षी डेमोक्रेट ट्रंप प्रशासन की आर्थिक और व्यापार नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी अपने एजेंडे और नीतियों के समर्थन में प्रचार कर रही है।
कनाडा पर टैरिफ लगाने के फैसले और ईरान के साथ संघर्ष को लेकर ओबामा की आलोचना भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। दोनों दलों के नेता अपने-अपने मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
3 नवंबर को होगा मतदान
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों के लिए चुनाव निर्धारित हैं। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में दलों की स्थिति का असर राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल में कानून बनाने और नीतियों को आगे बढ़ाने की क्षमता पर पड़ सकता है।
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मुकाबला अहम माना जा रहा है। अब चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में महंगाई, व्यापार नीति, विदेश नीति और नेताओं के बयानों का मतदाताओं पर क्या असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
written by Siddhi Srivastava



