Supreme Court: पुराने वोटरों से फॉर्म-6 क्यों भरवा रहा चुनाव आयोग? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

Supreme Court: दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 43 लाख नाम हटने का मामला; आयोग ने आवेदन की समयसीमा बढ़ाने की बात कही, दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई

Supreme Court: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए करीब 43 लाख लोगों को दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म मुख्य रूप से नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि किसी भी पात्र मतदाता को सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा। आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदनों की समयसीमा बढ़ाने की बात भी कही। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होने की जानकारी दी गई है।

पुराने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने पर क्या है आपत्ति?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि जो लोग पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, उनसे नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण वाला फॉर्म-6 भरवाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसा करने से पुराने मतदाताओं को ऐसी घोषणा करनी पड़ सकती है, जो उनकी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। इससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की आशंका भी पैदा हो सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस अंतर पर ध्यान दिलाया कि पहले से मतदाता रहे लोगों और पहली बार नाम दर्ज कराने वाले लोगों की स्थिति अलग है। कोर्ट ने कहा कि पुराने मतदाताओं से SIR से संबंधित फॉर्म भरवाया जाना चाहिए, न कि उन्हें नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए कहा जाना चाहिए।

नाम या पते में बदलाव होने पर फॉर्म-8 का विकल्प

सुनवाई में फॉर्म-8 का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने कहा कि जिन मतदाताओं ने अपना निवास स्थान बदला है या जिनके पहले से दर्ज विवरण में संशोधन की जरूरत है, उनके लिए फॉर्म-8 की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

इस मुद्दे का महत्व इसलिए है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, पहले से दर्ज जानकारी में सुधार करने और निवास स्थान बदलने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। ऐसे में आवेदन के लिए सही फॉर्म और प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से अहम है।

43 लाख नामों की मैपिंग और तार्किक विसंगतियों पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाने और तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancies) के आधार पर नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने इस श्रेणी की विसंगतियों की वैधता पर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट के मुताबिक, बिहार में SIR से संबंधित मामले में फैसला सुनाते समय यह विशिष्ट मुद्दा उसके सामने नहीं था। इस विषय पर आगे सुनवाई की जाएगी।

इससे स्पष्ट है कि दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सभी विवादों पर अभी अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में प्रक्रिया और संबंधित आपत्तियों पर विचार किया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदाता सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा। आयोग ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की बात भी कही।

हालांकि, समयसीमा में बदलाव की वास्तविक स्थिति और नई तारीखों की पुष्टि आयोग की आधिकारिक अधिसूचना से होगी। मतदाताओं के लिए यह देखना जरूरी होगा कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने तथा आवेदन जमा करने की संशोधित समयसीमा क्या तय की जाती है।

दिल्ली में SIR की समयसीमा बढ़ सकती है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में SIR के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 4 दिसंबर 2026 बताई गई थी।

चुनाव आयोग की ओर से समयसीमा बढ़ाने की बात कहे जाने के बाद इन तारीखों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, संशोधित कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा होने तक पुरानी तारीखों को बदला हुआ मानना उचित नहीं होगा।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें

दिल्ली SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान पुराने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने, नामों की मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के आधार पर नाम हटाने जैसे मुद्दे उठे। अदालत ने प्रक्रिया पर सवाल किए, जबकि चुनाव आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर नहीं रहने देने और आवेदन की समयसीमा बढ़ाने की बात कही।

अब अगली सुनवाई में इन मुद्दों पर अदालत की टिप्पणियों और चुनाव आयोग की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी। मतदाताओं को आवेदन प्रक्रिया और तारीखों से जुड़ी जानकारी के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए।

written by Siddhi Srivastava
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