
Gorakhpur MLC Election: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (सपा) की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने पहले कमलेश यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उनका टिकट काटकर डॉ. संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतार दिया। चुनाव में संजयन त्रिपाठी के तीसरे स्थान पर रहने के बाद टिकट बदलने के फैसले को सपा के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक चर्चा के मुताबिक, टिकट बदलने से कमलेश यादव के समर्थकों में नाराजगी पैदा हुई। दावा है कि इन समर्थकों ने सपा के नए प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार रंजीत यादव का समर्थन किया। हालांकि, मतों के इस कथित स्थानांतरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
आखिरी समय में टिकट बदलने से नाराज हुए समर्थक?
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर सपा ने शुरुआत में कमलेश यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। बाद में 3 अक्टूबर को पार्टी ने उनका टिकट काटकर डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बना दिया।
कमलेश यादव के समर्थकों की नाराजगी को सपा के चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। खबर के मुताबिक, पार्टी के एक कार्यकर्ता और वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े संगठन के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कमलेश यादव ने कई जिलों में जाकर शिक्षकों के बीच समर्थन जुटाने के लिए वर्षों तक मेहनत की थी।
उनके अनुसार, अंतिम समय में टिकट बदलने और दूसरे दल से आए संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाए जाने से कमलेश यादव के समर्थकों को झटका लगा। हालांकि, यह विवरण संबंधित पदाधिकारी के दावे पर आधारित है।
बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला
इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय उम्मीदवार रंजीत यादव के बीच मुकाबले की चर्चा रही। चुनाव से पहले सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी को भी प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा था, लेकिन परिणाम में उनका तीसरे स्थान पर रहना पार्टी के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी चर्चा में यह दावा सामने आया कि कमलेश यादव के समर्थकों ने सपा के नए उम्मीदवार को समर्थन देने के बजाय रंजीत यादव का साथ दिया। यदि ऐसा हुआ, तो टिकट बदलने के फैसले ने सपा के संभावित वोट आधार को प्रभावित किया हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए आधिकारिक मतों और स्थानीय चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है।
अखिलेश यादव की PDA रणनीति पर उठे सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को अहम स्थान दिया जाता है। ऐसे में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर उम्मीदवार बदलने के फैसले को पार्टी की रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
कमलेश यादव के समर्थकों का दावा है कि उनके पास माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र, मदरसा बोर्ड, CBSE शिक्षकों और यादव समुदाय के मतदाताओं का समर्थन था। उनके अनुसार, कमलेश यादव ने लगभग छह वर्षों तक व्यक्तिगत संपर्क के जरिए मतदाताओं का आधार तैयार किया था।
समर्थकों का आरोप है कि टिकट कटने के बाद यह समर्थन सपा के नए उम्मीदवार के पक्ष में पूरी तरह नहीं गया। चुनावी चर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि रंजीत यादव को इसका फायदा मिला। हालांकि, किसी खास सामाजिक समूह के मतदाताओं ने किस उम्मीदवार को कितना समर्थन दिया, इसका निष्कर्ष केवल दावों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
क्या टिकट बदलने का फैसला सपा पर भारी पड़ा?
संजयन त्रिपाठी के तीसरे स्थान पर रहने के बाद सपा के उम्मीदवार चयन को लेकर बहस शुरू हो गई है। पार्टी के सामने यह सवाल है कि क्या अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने से पहले से तैयार चुनावी समर्थन प्रभावित हुआ।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क, शिक्षक संगठनों का समर्थन और उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में टिकट बदलने के फैसले का असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा या नहीं, इसका आकलन आधिकारिक परिणामों और क्षेत्रवार मतों के विश्लेषण से ही किया जा सकता है।
फिलहाल, कमलेश यादव का टिकट काटकर संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाने का फैसला इस सीट के चुनावी घटनाक्रम का प्रमुख मुद्दा बन गया है। वहीं, निर्दलीय रंजीत यादव को कथित तौर पर मिले समर्थन ने सपा की रणनीति पर चर्चा को और तेज कर दिया है।



