
Akhilesh Yadav Azam Khan Meeting: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आजम खान से मुलाकात के लिए रामपुर पहुंचने की उनकी योजना पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।’ मौलाना का आरोप है कि अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव नजदीक आने के कारण मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
शहाबुद्दीन रजवी ने यह भी दावा किया कि आजम खान का पहले जैसा राजनीतिक प्रभाव अब नहीं रह गया है और अखिलेश यादव की इस यात्रा से समाजवादी पार्टी को अपेक्षित फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, ये मौलाना के राजनीतिक आकलन और आरोप हैं। मुस्लिम मतदाताओं का रुख क्या होगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियों और मतदाताओं के फैसले से स्पष्ट होगा।
‘अखिलेश यादव को अब आजम खान की याद आई’
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि अखिलेश यादव का आजम खान से मिलने का फैसला काफी देर से लिया गया कदम है। उनके मुताबिक, उन्होंने लंबे समय से मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों और आजम खान के मामले को विभिन्न मंचों पर उठाया है।
मौलाना ने दावा किया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने और आबादी के अनुपात में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने जैसे मुद्दे भी उठाए थे। उनका कहना है कि इन सवालों को लगातार उठाए जाने के बाद ही अखिलेश यादव आजम खान से मुलाकात करने जा रहे हैं।
रजवी ने रामपुर के लोगों के हवाले से तंज कसते हुए कहा कि अब इस मुलाकात से बहुत कुछ हासिल होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है कि अखिलेश यादव का फैसला उनके दबाव के कारण लिया गया है।
‘आजम खान का पहले जैसा रुतबा नहीं रहा’
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आजम खान के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आजम खान का जो रुतबा पहले था, वह अब नहीं रहा। उनके अनुसार, अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा का एक उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करना है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते रहे हैं। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनका राजनीतिक प्रभाव चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान के बीच मुलाकात को पार्टी के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी नेता का मौजूदा जनाधार केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए चुनावी नतीजों, स्थानीय परिस्थितियों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं को देखना जरूरी होगा।
सपा की राजनीति और मुस्लिम वोटों पर भी उठाए सवाल
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी की दूसरी राजनीतिक गतिविधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा दूसरे दलों, खासकर भाजपा से जुड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है और बाद में उन्हें टिकट दिए जाने की संभावना रहती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे नेताओं को मुस्लिम मतदाता क्यों समर्थन देंगे, जिन पर पहले मुस्लिम समुदाय के हितों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं। मौलाना ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाता अपने विवेक के आधार पर फैसला करेंगे और केवल राजनीतिक अपील के कारण किसी पार्टी को वोट नहीं देंगे।
उनके बयान में समाजवादी पार्टी के प्रति मुस्लिम समुदाय की कथित नाराजगी का मुद्दा प्रमुख रहा। हालांकि, पूरे मुस्लिम समुदाय के मतदान व्यवहार को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग क्षेत्रों, उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं।
रामपुर में आजम खान से मिलेंगे अखिलेश यादव
तय कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात करेंगे। जेल में मुलाकात के बाद सपा प्रमुख के आजम खान के आवास पर जाकर उनके परिवार के सदस्यों से मिलने की भी योजना है।
इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी के भीतर संबंधों और उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आजम खान के साथ अखिलेश यादव की बातचीत के बाद पार्टी की ओर से कोई राजनीतिक संदेश दिया जाता है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है यह मुलाकात?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी के लिए मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन लंबे समय से उसकी चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता से अखिलेश यादव की मुलाकात को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस यात्रा को देर से उठाया गया कदम बताते हुए सपा की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर, मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक प्रभाव का आकलन उसके बाद सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं और आगे के घटनाक्रम से ही किया जा सकेगा।
फिलहाल, रामपुर की यह यात्रा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश निकलता है और मौलाना रजवी की आलोचना पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं।



