Epstein Files : हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरें वायरल, कांग्रेस ने पूछा- अकेले नहीं मिले तो फोटो कैसे आईं?

Epstein Files : जेफ्री एपस्टीन के साथ हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें वायरल होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। जानिए अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के दस्तावेज, राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और पुरी की पुरानी सफाई।

Epstein Files : अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इन तस्वीरों को लेकर पुरी के पुराने बयान पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पूछा है कि अगर पुरी एपस्टीन से केवल प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले थे, तो तस्वीरों में दूसरे लोग कहां हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, ये तस्वीरें अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों के नौवें सेट में शामिल हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर BJP और RSS को निशाने पर लिया।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर मिलीं तस्वीरें

जेफ्री एपस्टीन और हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर ये तस्वीरें Data Set 9 में EFTA01191294 नाम की फाइल के तहत उपलब्ध हैं। इस सेट में दोनों की कम से कम 11 तस्वीरें होने का दावा किया गया है।

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद पुरी और एपस्टीन के बीच मुलाकातों की प्रकृति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल तस्वीरों में साथ दिखाई देना किसी व्यक्ति की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।

कांग्रेस ने पूछा- फिर तस्वीरों में बाकी लोग कहां हैं?

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब हरदीप सिंह पुरी कहते रहे हैं कि वह जेफ्री एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले, तो सामने आई तस्वीरों का क्या मतलब है?

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पुरी के पुराने बयान का हवाला देते हुए सवाल किया कि अगर उनकी मुलाकातें तीन-चार बार प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई थीं, तो तस्वीरों में प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य क्यों नजर नहीं आ रहे हैं?

विपक्षी नेताओं के इन सवालों के बाद तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, तस्वीरों का पूरा संदर्भ, उनमें मौजूद अन्य लोगों की पहचान और मुलाकात के हालात अलग से सत्यापित किए जाने जरूरी हैं।

राहुल गांधी ने BJP और RSS पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी एपस्टीन और हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरों को लेकर BJP और RSS पर तंज कसा। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुंबई पहुंचने और अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से तस्वीर जारी किए जाने का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने लिखा कि BJP और RSS के कार्यकर्ता बताएं कि उनके हिसाब से किस देश-विरोधी गद्दार को ब्लैकमेल किया जा रहा है।

उनके इस बयान के बाद मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गया है। हालांकि, ब्लैकमेलिंग से जुड़े आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण सामने आना जरूरी है।

नवंबर 2025 में भी चर्चा में आया था पुरी और एपस्टीन का संपर्क

हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के संपर्क का मामला पहली बार नवंबर 2025 में सार्वजनिक चर्चा में आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की निगरानी समिति की ओर से जारी एक ईमेल में दोनों के बीच संपर्क का जिक्र किया गया था।

इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के बड़े संग्रह को सार्वजनिक किया। इनमें जून 2014 से जून 2017 के बीच के कुछ ईमेल भी शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित ईमेल में पुरी के 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर जाने का उल्लेख है। इन मुलाकातों के संदर्भ और उद्देश्य को समझने के लिए संबंधित दस्तावेजों की पूरी सामग्री देखना महत्वपूर्ण है।

एपस्टीन को ईमेल में पुरी ने क्या लिखा था?

रिपोर्ट में 24 दिसंबर 2014 को हरदीप सिंह पुरी की ओर से जेफ्री एपस्टीन को भेजे गए एक ईमेल का भी जिक्र है। इसमें पुरी ने त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए एपस्टीन के द्वीप से लौटने पर उनसे बातचीत करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने भारत में रुचि बढ़ाने के लिए कुछ किताबें देने की बात भी कही थी।

एक अन्य ईमेल में एपस्टीन के द्वीप का उल्लेख किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे। पुरी ने पहले सफाई दी थी कि ‘हैव फन’ कहना उनके बोलने का सामान्य तरीका है।

ईमेल का पूरा संदर्भ देखे बिना किसी एक वाक्यांश से मुलाकात के उद्देश्य या संबंधों की प्रकृति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

हरदीप सिंह पुरी ने पहले क्या सफाई दी थी?

इस साल फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन फाइलों को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातें पेशेवर थीं और उनका एपस्टीन के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था।

पुरी के मुताबिक, वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत का पद छोड़ने के बाद और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले एपस्टीन से मिले थे। उन्होंने दावा किया था कि ये मुलाकातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में हुई थीं।

पुरी ने यह भी कहा था कि पहली मुलाकात के समय उन्हें एपस्टीन के बारे में जानकारी नहीं थी और बाद में उसके बारे में खोजबीन की गई थी।

अब तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष उनके पुराने बयानों पर सवाल उठा रहा है। इस विवाद में तस्वीरों, ईमेल और पुरी की सफाई को उनके पूरे संदर्भ में देखना अहम है।

कौन था जेफ्री एपस्टीन?

जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक धनी फाइनेंसर था, जिसके कई प्रभावशाली नेताओं, कारोबारियों और चर्चित हस्तियों से संपर्क थे। वर्ष 2008 में उसे नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया गया था।

वर्ष 2019 में उसे यौन तस्करी के संघीय आरोपों में गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई से पहले उसी साल जेल में उसकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। उसकी सहयोगी घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में मदद करने से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया गया था और उसे 20 साल की सजा सुनाई गई।

एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में कई प्रभावशाली लोगों के नाम और संपर्कों का उल्लेख होने के कारण यह मामला लंबे समय से चर्चा में है। हालांकि, किसी दस्तावेज में नाम आने या किसी तस्वीर में साथ दिखाई देने मात्र से किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित नहीं होता।

तस्वीरें वायरल होने के बाद क्यों बढ़ा विवाद?

हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरों ने पुराने ईमेल और मुलाकातों को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। कांग्रेस इन तस्वीरों के आधार पर पुरी के पुराने बयानों पर सवाल उठा रही है, जबकि पुरी पहले मुलाकातों को पेशेवर बता चुके हैं।

अब इस विवाद में सबसे अहम सवाल तस्वीरों का संदर्भ, मुलाकातों की परिस्थितियां और संबंधित दस्तावेजों में दर्ज जानकारी की पुष्टि है। इन तथ्यों की स्वतंत्र जांच के बिना तस्वीरों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

Show More

Related Articles

Back to top button