
Ashtami 2026: शारदीय नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर, रविवार को सप्तमी तिथि समाप्त होने के बाद अष्टमी तिथि शुरू हो रही है। इस बार अष्टमी के साथ ही भद्रा भी लगने की बात कही गई है। वहीं, दोपहर में सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि भद्रा के दौरान मां दुर्गा की पूजा करना उचित है या नहीं और क्या सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ प्रभाव भद्रा के प्रभाव को कम कर सकता है?
पंचांग संबंधी मान्यताओं के अनुसार, भद्रा के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है। हालांकि, नियमित देवी पूजा, मंत्र जाप और आरती को इससे अलग माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु पूजा-पाठ कर सकते हैं, जबकि विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
आज अष्टमी और भद्रा कब से शुरू होगी?
पंचांग में दिए गए नई दिल्ली के समय के अनुसार, 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर सप्तमी तिथि समाप्त होकर अष्टमी शुरू होगी। इसी समय विष्टि करण लगने के कारण भद्रा भी आरंभ होगी। दी गई पंचांग जानकारी के मुताबिक, भद्रा रात 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी।
आज के प्रमुख पंचांग समय इस प्रकार हैं:
| धार्मिक समय | निर्धारित समय |
|---|---|
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 18 अक्टूबर, सुबह 8:27 बजे |
| भद्रा प्रारंभ | 18 अक्टूबर, सुबह 8:27 बजे |
| भद्रा समाप्त | 18 अक्टूबर, रात 9:42 बजे |
| सर्वार्थ सिद्धि योग प्रारंभ | 18 अक्टूबर, दोपहर 12:49 बजे |
| सर्वार्थ सिद्धि योग समाप्त | 19 अक्टूबर, सुबह 6:24 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे |
| राहुकाल | शाम 4:23 से 5:49 बजे |
नोट: ये समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। लखनऊ सहित अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।
भद्रा में मां दुर्गा की पूजा करना शुभ है या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं में भद्रा को विष्टि करण कहा जाता है। परंपरागत रूप से इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और कुछ नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भद्रा के दौरान मां दुर्गा की आराधना नहीं की जा सकती।
श्रद्धालु घर में मां दुर्गा की नियमित पूजा, दीप प्रज्वलन, पुष्प अर्पण, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं। देवी की भक्ति के लिए भद्रा के समाप्त होने की प्रतीक्षा करना अनिवार्य नहीं माना जाता।
वहीं, हवन, विशेष अनुष्ठान या अन्य संस्कार करने वाले श्रद्धालुओं को तिथि, नक्षत्र, करण और स्थानीय परंपरा के अनुसार उपयुक्त समय निर्धारित करना चाहिए।
सर्वार्थ सिद्धि योग में क्या भद्रा का प्रभाव समाप्त हो जाएगा?
पंचांग की दी गई जानकारी के अनुसार, रविवार को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा, जो 19 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
हालांकि, सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से भद्रा अपने आप समाप्त नहीं होती। दिए गए समय के अनुसार, 18 अक्टूबर को दोपहर 12:49 बजे से रात 9:42 बजे तक दोनों का संयोग रहेगा।
इसलिए सर्वार्थ सिद्धि योग को हर तरह के मांगलिक कार्य के लिए स्वतः दोषमुक्त समय मानना उचित नहीं है। देवी की नियमित पूजा और मंत्र जाप श्रद्धापूर्वक किए जा सकते हैं, लेकिन किसी विशेष अनुष्ठान के लिए अलग से मुहूर्त देखना बेहतर रहेगा।
महागौरी की पूजा और महाष्टमी व्रत कब रखा जाएगा?
अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 51 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। उदया तिथि के आधार पर इस बार महाष्टमी का व्रत और मां महागौरी की विशेष पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को की जाएगी।
इसका अर्थ है कि 18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि शुरू होने के बाद भी श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं, जबकि महाष्टमी व्रत और विशेष पूजन के लिए 19 अक्टूबर की तिथि अपनाई जा सकती है।
कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय निर्धारित करना चाहिए।
अष्टमी के दिन पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करते समय श्रद्धालु कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ रखें।
- मां दुर्गा को पुष्प अर्पित करें और श्रद्धानुसार दीपक जलाएं।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और आरती करें।
- भद्रा को लेकर नियमित पूजा-पाठ के संबंध में अनावश्यक चिंता न करें।
- विवाह, गृह प्रवेश या अन्य विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करें।
- महाष्टमी व्रत और कन्या पूजन का समय अपने क्षेत्र की पंचांग परंपरा के अनुसार तय करें।
क्या अष्टमी पर पूजा के लिए भद्रा समाप्त होने तक इंतजार करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित देवी आराधना और विशेष मांगलिक अनुष्ठानों के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए भद्रा के कारण सामान्य पूजा रोकने की जरूरत नहीं है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग और भद्रा का एक साथ होना पंचांग की दृष्टि से उल्लेखनीय है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि देवी की पूजा निष्फल हो जाएगी। विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से परामर्श लेना उचित रहेगा।
written by Siddhi Srivastava



