
Amethi News-रबी सीजन 2026-27 की शुरुआत के साथ ही दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई शुरू हो गई है। कृषि विभाग ने किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक के इस्तेमाल की सलाह दी है। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह निरंजन ने किसानों से अपील की है कि वे जरूरत के अनुसार सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) जैसे सल्फर युक्त उर्वरकों का उपयोग करें, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में किसान फॉस्फेटिक उर्वरक के रूप में अधिक मात्रा में डीएपी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलहनी और तिलहनी फसलों में सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग लाभकारी हो सकता है। इसमें फॉस्फोरस के साथ लगभग 11 प्रतिशत सल्फर और 19 से 20 प्रतिशत कैल्शियम पाया जाता है। ये पोषक तत्व फसलों की वृद्धि और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दलहनी फसलों में प्रोटीन निर्माण में मददगार है सल्फर
देवेंद्र सिंह निरंजन के अनुसार, चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों में सल्फर की पर्याप्त उपलब्धता उपयोगी होती है। यह राइजोबियम बैक्टीरिया की गतिविधियों और वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण की प्रक्रिया में सहायक होता है। इससे पौधों में प्रोटीन निर्माण के लिए आवश्यक पोषण मिलता है।
वहीं, राई, सरसों और अलसी जैसी तिलहनी फसलों में सल्फर तेल के निर्माण की प्रक्रिया के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसलिए इन फसलों में सल्फर की कमी नहीं होने देना चाहिए। किसानों को मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
कैल्शियम से पौधों की मजबूती में मिलती है मदद
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि कैल्शियम पौधों की कोशिका संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उचित पोषण से पौधों की वृद्धि, फलियों के विकास और दानों के अच्छे भराव में मदद मिल सकती है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे बिना जरूरत किसी एक उर्वरक का अत्यधिक इस्तेमाल करने से बचें। उर्वरकों की मात्रा का निर्धारण मिट्टी की जांच, फसल की आवश्यकता और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर करना अधिक उचित है।
जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध
देवेंद्र सिंह निरंजन ने बताया कि जिले में सल्फर युक्त उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उनके अनुसार, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) की 2,200 मीट्रिक टन और एनपीकेएस की 3,483 मीट्रिक टन मात्रा उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है।
कृषि विभाग ने किसानों से रबी फसलों की बुवाई के दौरान संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से खेती और जरूरत के मुताबिक उर्वरकों के प्रयोग से लागत को नियंत्रित करने तथा बेहतर पैदावार हासिल करने में मदद मिल सकती है।
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