
Politics: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि यदि पहले मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कोई गलती नहीं हुई थी, तो अब दोबारा संशोधन कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
इमरान मसूद का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से 17 राज्यों में SSR कराए जाने का फैसला मतदाता सूची की पिछली प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सबूत सार्वजनिक कर चुके हैं। हालांकि, उनके इन आरोपों और दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
राहुल गांधी के दावों का किया जिक्र
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राहुल गांधी की 25 नवंबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई उदाहरण सामने रखे गए थे। उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर एक ही घर के पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दर्ज होने और मतदाता पहचान से जुड़ी तस्वीरों में कथित विसंगतियों के आरोप लगाए गए थे।
इमरान मसूद ने कहा कि इन दावों को केवल राजनीतिक बयान बताकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए और उनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच कथित गठजोड़ का आरोप भी लगाया। कांग्रेस सांसद के अनुसार, मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह के बयान पर कांग्रेस सांसद का पलटवार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से चुनावी प्रक्रिया और राहुल गांधी के आरोपों को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि वह राजनाथ सिंह का सम्मान करते हैं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से पेश किए गए कथित सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को विस्तार से उठाया था। इमरान मसूद के मुताबिक, जिन मामलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
‘गलती नहीं हुई तो दोबारा SSR क्यों?’
मतदाता सूची के संशोधन को लेकर इमरान मसूद ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि यदि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह सही थी, तो कुछ ही महीनों के भीतर दोबारा SSR कराने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? उन्होंने कहा कि 17 राज्यों में पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू किए जाने के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह बताना चाहिए कि नए पुनरीक्षण की जरूरत किन परिस्थितियों में पड़ी और पहले की प्रक्रिया में सामने आई कथित विसंगतियों का समाधान किस तरह किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में जल्दबाजी की गई। हालांकि, SSR कराए जाने का फैसला अपने आप में पिछली प्रक्रिया में गलती स्वीकार किए जाने का प्रमाण नहीं है। इस संबंध में चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और पुनरीक्षण के कारण महत्वपूर्ण होंगे।
सुप्रीम कोर्ट और मतदाता सूची के मामलों का उठाया मुद्दा
इमरान मसूद ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायिक स्तर पर इन मुद्दों की जांच होने से संबंधित पक्षों को जवाब देना पड़ सकता है। उन्होंने फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों के स्थान बदलने या मृत्यु होने के आधार पर मतदाता सूची में संशोधन किए जाने के बावजूद नामों में बदलाव को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कथित तौर पर 92 लाख नाम हटाए जाने और बड़ी संख्या में लोगों के अपील करने का मुद्दा सामने आया है।
इमरान मसूद ने कहा कि यदि अपीलों के बाद हटाए गए नाम बहाल होते हैं, तो मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा की मांग उठ सकती है। उन्होंने इन मामलों में दस्तावेजी प्रमाणों की भूमिका पर जोर दिया। इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित चुनावी प्राधिकरणों का पक्ष इस मुद्दे की पूरी तस्वीर समझने के लिए आवश्यक है।
संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर भी उठाए सवाल
इमरान मसूद ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक प्रभाव के सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं का स्वतंत्र रहना और सभी पक्षों के प्रति निष्पक्ष व्यवहार करना जरूरी है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल केवल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के विश्वास से है। उन्होंने मौजूदा सरकार की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं और अंततः जनता ही फैसला करती है। उन्होंने वर्ष 2029 के आम चुनाव का जिक्र करते हुए सरकार के भविष्य पर भी बयान दिया।
अनुच्छेद 370 और कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा को घेरा
इमरान मसूद ने भाजपा सांसद साक्षी महाराज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और वहां उनके स्थायी रूप से बसने को लेकर जमीनी स्तर पर क्या प्रगति हुई है।
उन्होंने दावा किया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी कश्मीरी पंडितों की वापसी और वहां संपत्ति खरीदने जैसे मुद्दों पर कई सवाल बने हुए हैं। इमरान मसूद ने भाजपा नेताओं से इन विषयों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उनके बयान में जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले।
CJP के प्रदर्शन और मदन राठौड़ के बयान पर प्रतिक्रिया
इमरान मसूद ने CJP के तिरंगा मार्च से पहले सेंट्रल पार्क बंद किए जाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे राजनीतिक बदलाव से जोड़ते हुए राहुल गांधी का जिक्र किया और दावा किया कि देश में राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देना चाहिए।
इसके अलावा, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के पाकिस्तान संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि किसी देश के प्रति विचार केवल धार्मिक आधार पर नहीं बनने चाहिए। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान की आलोचना भी की और उसे लेकर अपनी राजनीतिक टिप्पणी रखी।
मतदाता सूची का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
उत्तर प्रदेश में SIR के बाद SSR को लेकर उठे सवालों ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जहां पुनरीक्षण की जरूरत और कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं इन आरोपों का मूल्यांकन आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और संबंधित मामलों में सामने आने वाले दस्तावेजों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
फिलहाल SSR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और भाजपा नेताओं के बयानों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
written by Siddhi Srivastava



