
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को संसद में पेश करने को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। इन विधेयकों पर आगे बढ़ने के लिए सरकार संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के साथ पर्याप्त अतिरिक्त समर्थन सुनिश्चित करना चाहती है। हालांकि, फिलहाल इन विधेयकों पर चर्चा के लिए अलग से विशेष संसदीय सत्र बुलाए जाने की संभावना स्पष्ट नहीं है।
मिल रही जानकारी के मुताबिक, यदि सरकार इन विधेयकों को जल्द संसद में पेश करना चाहती है, तो मानसून सत्र के अगले चरण में इन्हें लाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सरकार विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी संख्या का आकलन कर रही है।
दिवाली से पहले दो से तीन दिन का सत्र बुलाने की चर्चा
संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में चर्चा है कि क्या सरकार दिवाली से पहले दो से तीन दिनों का संसदीय सत्र बुला सकती है। इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों को पेश करने और पारित कराने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि, यह सत्र अलग से बुलाया जाएगा या मानसून सत्र के अगले चरण के रूप में आयोजित होगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।
बहुमत जुटाने पर रहेगा जोर
विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक संसदीय समर्थन जुटाना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, सरकार तभी आगे बढ़ना चाहती है, जब उसे जरूरी दो-तिहाई बहुमत के साथ अतिरिक्त सांसदों के समर्थन का भरोसा हो।
फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। संसद के सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश किए जाने के संबंध में अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
written by Siddhi Srivastava



