
Abu-Dhabi News- भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपनी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, वैश्विक परिस्थितियों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और यूएई के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है।
अबू धाबी पहुंचने पर यूएई की मंत्री रीम अल हाशमी ने विदेश मंत्री का स्वागत किया। इसके बाद जयशंकर ने यूएई के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ ‘रायसीना डायलॉग मिडिल ईस्ट’ के एक सत्र में हिस्सा लिया।
बदलती वैश्विक व्यवस्था पर हुई चर्चा
‘द वर्ल्ड अहेड: पावर, पर्पस एंड पॉसिबिलिटी’ विषय पर आयोजित चर्चा में वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के भविष्य पर विचार-विमर्श किया गया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि दुनिया के कई देश बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच नए सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं। देश अब पारंपरिक रणनीतिक गठबंधनों से आगे बढ़कर नई साझेदारियों को महत्व दे रहे हैं।
उन्होंने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, सीमित देशों के बीच मजबूत सहयोग यानी मिनीलेटरल साझेदारी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने पिछले एक दशक में भारत और यूएई के संबंधों में आए बदलावों को भी इसका उदाहरण बताया।
भारत-यूएई संबंधों को मजबूत करने पर जोर
पैनल चर्चा के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की।
इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर चर्चा
विदेश मंत्री ने ‘द कॉन्टिनेंटल कॉरिडोर्स: हू कनेक्ट्स द हार्टलैंड?’ विषय पर आयोजित एक अन्य पैनल में भी भाग लिया। इस सत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के रणनीतिक महत्व पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा कि वैश्वीकरण को पीछे नहीं ले जाया जा सकता, लेकिन इसे अधिक लचीला और भरोसेमंद बनाने की जरूरत है।
उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में कनेक्टिविटी को लेकर नई सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि नए व्यापार मार्गों के विकास के साथ भारत अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाने पर ध्यान दे रहा है।
भारत और यूएई के बीच बढ़ता सहयोग व्यापार, रणनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह यात्रा दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में साझा हितों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है।
रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी
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