
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और पूर्व सांसद मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रतिमा स्थल वाले चौराहे का नाम मसुरियादीन पासी के नाम पर रखा जाएगा। इसके लिए उन्होंने महापौर से प्रस्ताव मांगा। साथ ही प्रयागराज की एक अच्छी संस्था का नाम भी उनके नाम पर करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और जेल भी गए। वे 1932 से 1944 के बीच करीब नौ साल तक जेल में रहे। रिहा होने के बाद भी उन्होंने जन-जागरण का काम जारी रखा। उनका जीवन वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। महापुरुषों को सम्मान देने से समाज आगे बढ़ता है और आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्षों से सीख मिलती है। सीएम योगी ने बताया कि मसुरियादीन पासी 1946 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। इसके बाद 1952 से 1972 तक चार बार लोकसभा के लिए चुने गए। वर्ष 1952 में जब एक सीट से दो सांसद चुने जाते थे, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ संसद पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाकर पासी समाज समेत कई समुदायों को अपमानित किया था। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मसुरियादीन पासी ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई। इस संघर्ष ने वंचित और दलित समाज को सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
ऊदा देवी और बिजली पासी का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने पासी समाज के शौर्य और पराक्रम का उल्लेख करते हुए महाराजा बिजली पासी और वीरांगना ऊदा देवी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार कराया है। वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित करने और उनकी अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की भी बात कही। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिमा अनावरण को ऐतिहासिक क्षण बताया। वहीं, मसुरियादीन पासी के पौत्र सचिन कुमार ने उनके योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद प्रवीण पटेल, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी समेत कई जनप्रतिनिधि और परिवार के सदस्य मौजूद रहें।
रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी



