
Rahul Gandhi Balaghat: मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बैहर क्षेत्र के जागला गांव पहुंचे और बीमारी से जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य सुविधाओं, वन अधिकार, मनरेगा, शिक्षा और मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है और बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाना सरकार की जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर सवाल है।
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाकों में पिछले कुछ महीनों से बच्चों की बीमारी और मौतों का मामला चर्चा में है। सितंबर में सामने आई रिपोर्टों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया था। वहीं, अलग-अलग जांचों में खसरा, मलेरिया, संक्रमण, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का जिक्र सामने आया है। राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम की रिपोर्ट में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था से जुड़ी कमियों का भी उल्लेख किया गया था।
बच्चों की मौत और स्वास्थ्य व्यवस्था पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
जागला गांव में प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि बीमारी और कुपोषण से बच्चों की मौत हुई है और समय पर इलाज नहीं मिलना सरकार की विफलता है। राहुल गांधी ने सरकार पर प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को उनके अधिकार मिलने चाहिए। इनमें वन अधिकार कानून के तहत जमीन के पट्टे, मनरेगा के तहत रोजगार और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बच्चों की मौत के मामले को वह लोकसभा में उठाएंगे और इसे सिर्फ बालाघाट तक सीमित नहीं रखेंगे।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला पहले ही प्रशासनिक और न्यायिक जांच के दायरे में है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम भी प्रभावित गांवों का दौरा कर चुकी है। वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले में राज्य सरकार से जवाब और संबंधित दस्तावेज मांगे थे।
मुआवजा और वन अधिकार का मुद्दा भी उठाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और वन अधिकार कानून को लागू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और सरकार को शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर किसी परिवार को एक सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल रही है तो दूसरी योजना का लाभ उससे नहीं छीना जाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस की सरकार बनने पर आदिवासी समुदाय की मदद करने की बात भी कही। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी समुदाय को उनके वन अधिकार दिलाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए काम करेगी।
बोले- आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए
राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक शब्दावली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उन्हें ‘वनवासी’ नहीं, बल्कि ‘आदिवासी’ कहती है। उनके मुताबिक आदिवासी समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य और अपने अधिकार मिलने चाहिए।
राहुल गांधी ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार से प्रभावित परिवारों की मदद करने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें सहायता और न्याय मिलना जरूरी है।
बालाघाट मामले में पहले भी उठते रहे हैं सवाल
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला अगस्त से ही लगातार चर्चा में है। शुरुआती रिपोर्टों में दूषित पानी और पोषण की कमी जैसी संभावनाओं पर भी सवाल उठे थे। बाद की जांचों में मलेरिया, खसरा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के मामले सामने आए। राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम की रिपोर्ट में स्वास्थ्य व्यवस्था और बीमारी की निगरानी से संबंधित कई कमियां दर्ज की गई थीं।
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी जांच की और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद राज्य सरकार से जवाब मांगा गया। ऐसे में राहुल गांधी का बालाघाट दौरा इस पूरे मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में ले आया है।
अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई के साथ प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता पर भी नजर रहेगी। वहीं, राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वह बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और इससे जुड़े मुद्दों को संसद में उठाएंगे।



