जानकारी के अनुसार, 63 अभ्यर्थियों के एक समूह ने कुल 27 प्रश्नों को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। इससे पहले चार उम्मीदवारों ने अलग याचिका में आठ प्रश्नों पर आपत्ति जताई थी। अब नया मामला सामने आने के बाद विवाद और व्यापक हो गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
UPSC CSE प्रीलिम्स 2026 के जनरल स्टडीज पेपर-1 के कुछ प्रश्नों को लेकर सबसे पहले अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उम्मीदवारों का कहना था कि कुछ उत्तर आधिकारिक और प्रमाणिक स्रोतों से मेल नहीं खाते। इसके अलावा कुछ सवालों की भाषा और विकल्पों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बताई गई।
पहली याचिका में आठ प्रश्नों को चुनौती दी गई थी, जबकि नई याचिका में उन्हीं प्रश्नों सहित कुल 27 सवालों को विवादित बताया गया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि इन प्रश्नों में तथ्यात्मक त्रुटियां और उत्तर निर्धारण से जुड़ी समस्याएं मौजूद हैं।
किन विषयों के प्रश्न बने विवाद की वजह?
विवादित प्रश्न अलग-अलग विषयों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के नियम, जीरो एफआईआर की अवधारणा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधान, ऋग्वैदिक काल और कृषि से जुड़े प्रश्न शामिल हैं।
उम्मीदवारों का आरोप है कि कुछ सवालों की व्याख्या और उत्तर उपलब्ध मानक स्रोतों से मेल नहीं खाते। वहीं, जीरो एफआईआर से जुड़े प्रश्न में प्रारंभिक जांच और औपचारिक जांच के बीच अंतर को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। ग्रैंड स्लैम से संबंधित प्रश्नों में नियमों और रैंकिंग व्यवस्था की व्याख्या को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कटऑफ के करीब रहे अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
इस विवाद का सबसे बड़ा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है जो मुख्य परीक्षा (Mains) की कटऑफ के बेहद करीब रह गए। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि विवादित प्रश्नों के उत्तरों में बदलाव होता है तो उनके अंक बढ़ सकते हैं और परिणाम प्रभावित हो सकता है।
कुछ उम्मीदवारों ने दावा किया है कि वे केवल एक या दो अंकों के अंतर से मेंस परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित हुए हैं। ऐसे में आंसर की में किसी भी संशोधन का उनके करियर पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर अंतिम प्रयास देने वाले उम्मीदवारों के लिए यह मामला और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
UPSC को देना होगा जवाब
मामले को गंभीर मानते हुए CAT ने UPSC को नोटिस जारी किया है। अब आयोग को उम्मीदवारों की आपत्तियों पर अपना पक्ष रखना होगा। हालांकि फिलहाल यह तय नहीं है कि विवादित प्रश्नों में वास्तव में कोई गलती है या नहीं। इसका अंतिम फैसला सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही होगा।
8 अक्टूबर पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। संभावना है कि उसी दिन दोनों याचिकाओं पर एक साथ चर्चा हो सकती है। शिक्षा जगत और UPSC अभ्यर्थियों की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि UPSC CSE प्रीलिम्स 2026 का आयोजन 24 मई को हुआ था और इसका परिणाम 15 जून को घोषित किया गया था। इसके बाद अगस्त में मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। अब आंसर की विवाद ने परीक्षा प्रक्रिया को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।