Jharkhand: झारखंड मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की उम्र में अचानक हार्ट अटैक से निधन

JMM के वरिष्ठ नेता और CM हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी का गिरिडीह के निजी अस्पताल में निधन; सभी दलों के नेताओं ने जताया शोक

Jharkhand: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात अचानक हार्ट अटैक आने के बाद गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 56 वर्ष के थे।

क्या हुआ था

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सुदिव्य कुमार को अपने गिरिडीह स्थित आवास पर सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत मर्सी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। समय पर बेहतर इलाज के लिए रांची ले जाना भी संभव नहीं हो सका।

हेमंत सोरेन सरकार में एक भरोसेमंद चेहरा

सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने 2019 में पहली बार यह सीट JMM के टिकट पर जीती थी और 2024 के विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की। दोबारा विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल किया, जहां उनके पास चार महत्वपूर्ण विभाग थे — उच्च एवं तकनीकी शिक्षा; नगर विकास एवं आवास; तथा पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य।

उन्हें हेमंत सोरेन के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में गिना जाता था। 2024 में सीएम की गिरफ्तारी के बाद के मुश्किल दौर में पार्टी को संभालने में उनकी अहम भूमिका रही। निधन से कुछ दिन पहले ही वे कर्नाटक से लौटे थे, जहां उन्होंने एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए वहां के पर्यटन ढांचे का अध्ययन किया था।

हाल ही में हुए छात्र आंदोलन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई — JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों से बातचीत में सरकार का पक्ष रखा।

जंतर-मंतर मारपीट मामला! स्वतंत्र भारद्वाज एक दिन की पुलिस हिरासत में, विरोध में उतरे हिंदूवादी संगठन

राजनीतिक नेताओं ने जताया शोक

JMM ने आधिकारिक बयान जारी कर उनके निधन को पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं और सहयोगियों ने भी शोक जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

परिवार में शोक की लहर

सुदिव्य कुमार सोनू अपने पीछे पत्नी और बच्चों को छोड़ गए हैं। मुख्यमंत्री के करीबी होने और सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने के कारण उनके निधन को झारखंड सरकार और JMM के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति माना जा रहा है।

Show More

Related Articles

Back to top button