
Health News: कई लोगों ने कभी-न-कभी यह महसूस किया होगा कि सांस लेते या छोड़ते समय छाती से सीटी जैसी आवाज आने लगती है। आम भाषा में इसे “सांस से सीटी की आवाज” कहा जाता है। शुरुआत में यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन अगर यह बार-बार हो, सांस फूलने लगे या सीने में जकड़न महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। यह आवाज अक्सर इस बात का संकेत होती है कि फेफड़ों तक हवा का रास्ता पूरी तरह खुला नहीं है।
दरअसल, जब फेफड़ों की नलियां संकरी हो जाती हैं या उनमें सूजन, बलगम या ऐंठन आ जाती है, तो हवा के आने-जाने में रुकावट पैदा होती है। इसी रुकावट की वजह से सांस के साथ सीटी जैसी आवाज सुनाई देती है। कई बार यह अस्थायी समस्या होती है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकती है।
छाती में सीटी की आवाज आने के मुख्य कारण
सबसे आम कारणों में अस्थमा शामिल है। इस स्थिति में एयरवे में सूजन और सिकुड़न आ जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है और सीटी जैसी आवाज सुनाई देती है। अस्थमा के मरीजों में यह समस्या रात के समय, ठंडी हवा में या एलर्जी के संपर्क में आने पर ज्यादा बढ़ जाती है।
एलर्जी या संक्रमण भी इसका बड़ा कारण हो सकता है। धूल, धुआं, पराग कण, पालतू जानवरों के बाल या किसी वायरल-बैक्टीरियल संक्रमण से एयरवे में सूजन आ सकती है। सर्दी-खांसी के दौरान कई लोगों को छाती में घरघराहट या सीटी की आवाज सुनाई देने लगती है।
ब्रोंकाइटिस की स्थिति में भी ऐसा हो सकता है। लंबे समय तक खांसी रहना, गाढ़ा बलगम बनना और सीने में भारीपन महसूस होना इसके आम लक्षण हैं। इसमें फेफड़ों की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे सांस की आवाज बदल जाती है।
जो लोग लंबे समय से सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे मामलों में फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और सांस लेते समय सीटी या घरघराहट की आवाज आने लगती है। यह एक गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है।
सांस लेने में दिक्कत हो तो क्या करें?
अगर अचानक सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो सबसे पहले शांत रहें। घबराने से सांस और ज्यादा तेज हो सकती है। सीधा बैठ जाएं या हल्का आगे झुककर बैठें ताकि फेफड़ों पर दबाव कम हो।
जिस चीज से एलर्जी या परेशानी बढ़ती हो, उससे दूरी बना लें। धूल, धुआं, ठंडी हवा या तेज गंध से बचना जरूरी है।
अगर पहले से कोई इनहेलर या राहत देने वाली दवा बताई गई हो, तो उसे सही तरीके से इस्तेमाल करें।
गर्म भाप लेना और गुनगुना पानी पीना भी कई बार राहत दे सकता है, क्योंकि इससे बलगम ढीला पड़ता है और एयरवे खुलने में मदद मिलती है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर छाती में सीटी की आवाज के साथ-साथ सांस बहुत ज्यादा फूलने लगे, बोलने में दिक्कत हो या सांस लेते समय सीने में तेज दर्द हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
इसके अलावा अगर होंठ, उंगलियां या चेहरा नीला पड़ने लगे, लगातार चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो, तो देर न करें। यह स्थिति आपातकालीन भी हो सकती है।
इससे बचाव के लिए क्या करें?
इस समस्या से बचने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव बेहद जरूरी हैं।
धूम्रपान और पैसिव स्मोकिंग से पूरी तरह बचें।
घर और आसपास का माहौल साफ-सुथरा रखें, ताकि धूल और एलर्जी फैलाने वाले कण कम रहें।
भीड़-भाड़ या प्रदूषित जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
अगर किसी खास चीज से एलर्जी है, तो उसे पहचानकर उससे दूरी बनाएं।
छाती में सीटी की आवाज कभी-कभी सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रही है या इसके साथ सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो इसे हल्के में न लें। समय पर ध्यान देने और सही देखभाल से गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है।
Written By : Anushri Yadav



