
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की हेल्थ एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि दुनिया भर में लगभग 3 करोड़ बच्चों को खसरे की वैक्सीन नहीं मिल सकी, जिसके कारण यह संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने और टीकाकरण कार्यक्रमों में गिरावट से स्थिति गंभीर होती जा रही है।
डब्लूएचओ की इम्यूनाइजेशन, वैक्सीन और बायोलॉजिकल्स की डायरेक्टर डॉ. केट ओ’ ब्रायन ने कहा कि खसरा सबसे अधिक संक्रामक सांस संबंधी वायरस में से एक है। एक संक्रमित व्यक्ति 18 लोगों को तक संक्रमित कर सकता है। लोग अक्सर इसे मामूली समझते हैं, लेकिन यह जानलेवा हो सकता है। उनके अनुसार, खसरा संक्रमित हर पांच में से एक बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ती है।
मामलों में तेज़ उछाल
डब्लूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष दुनिया भर में करीब 1.1 करोड़ लोग खसरे से संक्रमित हुए, जो महामारी से पहले की तुलना में लगभग 8 लाख अधिक है। अधिकांश मौतें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हुईं और इनमें से लगभग 80 प्रतिशत अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में दर्ज की गईं।
डॉ. ओ’ ब्रायन ने स्पष्ट किया कि खसरा पूरी तरह रोका जा सकता है और किसी भी बच्चे को खसरे का दुष्परिणाम झेलने की ज़रूरत नहीं है। वैक्सीन की दो डोज़ 95 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करती हैं। लेकिन दुर्भाग्य से कई बच्चे इसलिए असुरक्षित हैं क्योंकि स्वास्थ्य सेवाएं उन तक पहुँच ही नहीं पा रहीं।
टीकाकरण में चिंताजनक गिरावट
2023–24 के दौरान दुनिया भर में सिर्फ़ 84 प्रतिशत बच्चों को खसरे की पहली और 76 प्रतिशत को दूसरी आवश्यक डोज़ मिल सकी। इसका मतलब है कि लगभग 30 मिलियन बच्चे असुरक्षित रह गए। ये बच्चे मुख्य रूप से अफ्रीका और पूर्वी भूमध्य क्षेत्र के संघर्ष-ग्रस्त या अत्यधिक प्रवासी समुदायों में रह रहे हैं।
डब्लूएचओ के अनुसार 2024 में 59 देशों में बड़े और खतरनाक प्रकोप दर्ज किए गए। यह संख्या 2021 के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन देशों में से कई पहले खसरे को समाप्त घोषित कर चुके थे।
खसरा रोकने में सबसे बड़ी चुनौती, पहुँच
डब्लूएचओ की जरूरी इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम हेड डायना चांग-ब्लैंक ने कहा कि खसरा किसी सीमा को नहीं मानता। दुनिया का कोई भी देश तब तक सुरक्षित नहीं हो सकता जब तक हर बच्चा सुरक्षित न हो।
डब्लूएचओ ने खसरे में बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों की पहचान की है, जिनमें महामारी के दौरान नियमित टीकाकरण में आई भारी कमी, ज़ीरो-डोज़ वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, कमजोर नियमित टीकाकरण सिस्टम और वैक्सीन को लेकर फैलती गलत सूचनाएँ और सीमित उपलब्धता है।
डॉ. ओ’ ब्रायन ने माना कि ऑनलाइन फैलती गलत सूचनाओं से भरोसा प्रभावित हुआ है, लेकिन उनके अनुसार सबसे बड़ी समस्या हिचकिचाहट नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच है। उन्होंने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे सही और प्रमाणिक जानकारी साझा करें।
वैश्विक ‘बिग कैच-अप’ अभियान
डब्लूएचओ समेत वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे बिग कैच-अप अभियान के तहत अब तक 1.1 करोड़ से अधिक बच्चों को वैक्सीन दी जा चुकी है। यह अभियान 2025 तक जारी रहेगा।
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हालाँकि, WHO ने चेताया है कि यदि देशों ने निगरानी मजबूत नहीं की, तेजी से फैलने पर तुरंत कार्रवाई नहीं की और राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, तो *इम्यूनाइजेशन एजेंडा 2030* के लक्ष्य पीछे छूट सकते हैं।



