
Varanasi News- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ में बुधवार शाम आयोजित एग्रीकल्चर प्रीमियर लीग (एपीएल) सीज़न–07 का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कृषि मैदान में उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। खेल आयोजन का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने किया।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि वे छात्रों के चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ खेलों में सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है और एग्रीकल्चर प्रीमियर लीग जैसे आयोजन इस दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास हैं, जो छात्रों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करने के साथ-साथ उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
कुलपति ने विशेष रूप से छात्राओं की टीमों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल के मैदान में छात्राओं की मजबूत उपस्थिति सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
इस अवसर पर गेस्ट ऑफ ऑनर एथलीट नीलू मिश्रा ने एग्रीकल्चर प्रीमियर लीग के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि खेल युवाओं में आत्मविश्वास, साहस और निर्णय क्षमता विकसित करते हैं तथा टीम गेम्स जीवन में सहयोग, समर्पण और आपसी सम्मान का महत्व सिखाते हैं। उन्होंने छात्राओं की टीमों के उत्साह, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को भी सशक्त रूप से स्थापित करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ की निदेशक ने कहा कि एग्रीकल्चर प्रीमियर लीग केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह संस्थान की सामूहिक ऊर्जा, एकता और जीवंतता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों में नेतृत्व, अनुशासन और संगठनात्मक क्षमता का विकास होता है, जो उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने आयोजन समिति, एथलेटिक एसोसिएशन तथा सभी स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने का आश्वासन दिया।
वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. ए. के. नेमा ने कहा कि विश्वविद्यालयों में खेल संस्कृति का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को भी विकसित करते हैं। एग्रीकल्चर स्पोर्ट्स बोर्ड के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक सिंह ने कहा कि खेल गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का अभिन्न अंग हैं। इस प्रकार के संगठित टूर्नामेंट छात्रों को अकादमिक जीवन की एकरसता से बाहर निकालकर ऊर्जा और उत्साह से भर देते हैं। डॉ. तरुन वर्मा ने कहा कि खेल जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे अनुशासन, समय प्रबंधन, संघर्ष और निरंतर प्रयास को सिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे खेलों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर और संतुलित मन ही अकादमिक और व्यावसायिक सफलता की कुंजी है। वहीं, डॉ. सुधीर राजपूत ने कहा कि खेल के मैदान में सीखे गए मूल्य जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होते हैं।
बताते चले एग्रीकल्चर प्रीमियर लीग सीज़न 07 में इस वर्ष बालक वर्ग की आठ टीमें—कोबरा चैलेंजर्स, हेलिको ब्लास्टर्स, म्यूटेंट स्ट्राइकर्स, स्पार्टन, अल्फोंसो इलेवन, एआरएस, ड्रैगन फाइटर्स एवं कुरियन वॉरियर्स—तथा बालिका वर्ग की चार टीमें—फीनिक्स वॉरियर्स, थंडर क्वीन, एग्रो सुपर नोवाज एवं धाकड़ इलेवन—भाग ले रही हैं, जिनकी सहभागिता ने प्रतियोगिता को रोमांचक और प्रतिस्पर्धात्मक बना दिया है।
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