
UP SIR : नवदीप रिनवा ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के जरिए अब तक केवल 4336 मतदाताओं के नाम ही दूसरों की आपत्ति पर हटाए गए हैं।
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अब तक कुल 1.35 लाख फॉर्म-7 भरे गए हैं, जिनमें से 23935 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकांश नाम स्वयं मतदाताओं द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर हटाए गए हैं।
कैसे और कितने नाम कटे?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि –
- कुल हटाए गए नाम : 23,935
- दूसरों की आपत्ति (फॉर्म-7) पर हटाए गए नाम : 4,336
- परिवार द्वारा मृत या दोहरी प्रविष्टि के कारण हटाए गए नाम: 14,388
- दूसरी जगह निवास करने के आधार पर हटाए गए नाम : 5,211
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नाम को केवल जांच में आपत्ति सही पाए जाने के बाद ही हटाया गया है।
2.22 करोड़ मामलों की घर-घर जांच
रिनवा ने बताया कि तार्किक विसंगतियों वाले 2.22 करोड़ मतदाताओं के मामलों में बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। यदि मतदाता घर पर मौजूद नहीं होंगे तो परिवार के अन्य सदस्य भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे।
सियासी बयानबाजी तेज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि फॉर्म-7 के जरिए दलित, पिछड़े और मुसलमान मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं, उन्हें नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है।
इस पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता बूथ स्तर पर सक्रिय हैं, जबकि विपक्ष के पास संगठनात्मक कार्यकर्ता नहीं हैं।
आयोग का पक्ष साफ
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोहराया कि मतदाता सूची संशोधन की पूरी प्रक्रिया नियमों और जांच के बाद ही की जा रही है। आयोग का कहना है कि किसी भी वर्ग विशेष को लक्षित कर कार्रवाई नहीं की जा रही है।



