
International News: विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राज्यसभा में बताया कि हाल ही में हिंद महासागर में ईरान के तीन जहाज मौजूद थे, जिनमें से एक जहाज को भारत ने मानवीय आधार पर अपने बंदरगाह पर शरण दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी तरह से समुद्री नियमों और मानवता के आधार पर लिया गया था।
राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनके एक जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है और वह सुरक्षित रूप से किसी बंदरगाह पर पहुंचना चाहता है। इस जहाज में बड़ी संख्या में युवा कैडेट और कुल 183 क्रू मेंबर मौजूद थे।
विदेश मंत्री के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए भारत ने जहाज को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर आने की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि समुद्र में संकट में फंसे जहाजों की मदद करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री परंपरा और मानवीय जिम्मेदारी का हिस्सा है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि उस समय हिंद महासागर क्षेत्र में ईरान के तीन जहाज मौजूद थे। इनमें से एक जहाज को भारत ने शरण दी, जबकि अन्य जहाज अलग-अलग दिशा में चले गए। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ निर्णय लिया और इसका उद्देश्य केवल मानवीय सहायता प्रदान करना था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति में मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून का हमेशा सम्मान किया जाता है। समुद्र में संकट में फंसे किसी भी जहाज या नाविक की मदद करना एक जिम्मेदार देश के रूप में भारत का कर्तव्य है।



