
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कई राज्यों में सरकारी खजाना खुलता नजर आ रहा है। महिला वोटरों और युवाओं को साधने के लिए नई-नई कैश बेनिफिट और डायरेक्ट ट्रांसफर योजनाओं का ऐलान हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में ऐसी योजनाएं सीधा वोट बैंक को टारगेट करती हैं।
Tamil Nadu में हाल ही में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता से जुड़ी योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना का मकसद घरेलू महिलाओं को सीधी आर्थिक मदद देना है, ताकि परिवार की आय में सहयोग मिल सके। राज्य सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।
इसी कड़ी में West Bengal सरकार ने ‘युवा साथी’ जैसी स्कीम लॉन्च की है, जिसका लक्ष्य युवाओं को वित्तीय सहायता और रोजगार से जोड़ना है। इससे पहले बिहार में भी युवाओं और महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की घोषणाएं हो चुकी हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘कैश बेनिफिट पॉलिटिक्स’ का नया दौर बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिला वोटर अब हर राज्य में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और मासिक सहायता योजनाएं चुनावी समीकरण बदल सकती हैं। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये योजनाएं लंबी अवधि में राज्यों की आर्थिक सेहत पर बोझ बनेंगी?
आने वाले महीनों में कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं। चुनावी मौसम में ‘गंगाजल’ की तरह योजनाओं का छिड़काव जारी है — अब देखना यह है कि जनता इन्हें विकास का कदम मानती है या सिर्फ चुनावी वादा।



