
Bihar Politics- बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। 25 जनवरी 2026 को पटना में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद यह फैसला पार्टी के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। लालू प्रसाद यादव की खराब सेहत के चलते अब तेजस्वी ही पार्टी के फैसलों का चेहरा बनते जा रहे हैं।
तेजस्वी पहले भी पार्टी के कई बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन अब उन्हें औपचारिक तौर पर नंबर दो की जिम्मेदारी मिल गई है। चुनौती यह है कि हालिया चुनाव में आरजेडी सिर्फ 25 सीटों तक सिमट गई। ऐसे में पार्टी को दोबारा खड़ा करना आसान नहीं होगा।
पार्टी के अंदर भी सब कुछ शांत नहीं है। तेजस्वी की ताजपोशी पर उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव और बहन रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाए हैं। इससे एक बार फिर परिवार के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उधर विपक्ष इस मौके को परिवारवाद से जोड़कर तेजस्वी पर हमला कर रहा है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि आरजेडी आज भी एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी को अध्यक्ष बनाना पार्टी को टूटने से बचाने के लिए जरूरी कदम था।
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तेजस्वी ने राजनीति में एंट्री 2015 में की थी और कम समय में खुद को बड़े नेता के तौर पर स्थापित किया। हालांकि हालिया चुनावी हार ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि संवाद की कमी और जमीनी स्तर पर कमजोर संपर्क इसकी बड़ी वजह रही।
अब तेजस्वी के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ पार्टी को अंदर से मजबूत करना और दूसरी तरफ बिहार की राजनीति में आरजेडी को फिर से प्रासंगिक बनाना। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी कोशिश पार्टी को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की होगी।
अगर तेजस्वी अपने पिता लालू यादव की राजनीतिक विरासत को नए अंदाज़ में आगे बढ़ाने में सफल होते हैं, तो आरजेडी को नई दिशा मिल सकती है। लेकिन इसके लिए उन्हें संगठन, परिवार और रणनीति तीनों मोर्चों पर संतुलन साधना होगा।



