
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादास्पद आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 14 साल की नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना, उसके पायजामा का नाड़ा खींचना और पुलिया के नीचे घसीटने की कोशिश करना रेप की कोशिश है, न कि सिर्फ अपराध की तैयारी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच (जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया के साथ) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च 2025 के फैसले को क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के सिद्धांतों का साफ गलत इस्तेमाल बताते हुए खारिज किया। कोर्ट ने कहा, “यौन अपराधों के मामलों में कानूनी तर्क के साथ-साथ सहानुभूति और संवेदनशीलता जरूरी है।” बेंच ने हाई कोर्ट को फटकार लगाई कि ऐसे संवेदनशील मामलों में फैसले में पीड़ित की कमजोरियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
घटना 10 नवंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में हुई। एक महिला अपनी 14 साल की बेटी के साथ ननद के घर से लौट रही थी। आरोपी पवन, आकाश और अशोक (सभी गांव के ही) ने उन्हें मोटरसाइकिल पर लिफ्ट देने की पेशकश की। रास्ते में आरोपी ने बाइक रोकी, लड़की को घसीटा, उसके ब्रेस्ट पकड़े, पायजामा का नाड़ा खींचा और पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की। लड़की के रोने की आवाज सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे, जिससे आरोपी भाग गए।
POCSO एक्ट की स्पेशल कोर्ट, कासगंज ने 23 जून 2023 को आरोपी को IPC की धारा 376 (रेप) के साथ POCSO एक्ट की धारा 18 (रेप की कोशिश) के तहत समन जारी किया था।17 मार्च 2025 को जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने आरोपी की रिवीजन पिटीशन पर फैसला सुनाया कि ये कार्रवाइयाँ रेप या रेप की कोशिश नहीं, बल्कि कपड़े उतारने की नीयत से हमला या क्रिमिनल फोर्स हैं। कोर्ट ने आरोपों को कम कर IPC धारा 354B और POCSO की धारा 9/10 तक सीमित कर दिया। इस फैसले पर सोशल मीडिया और एनजीओ में भारी आक्रोश हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, फैक्ट्स को देखते हुए कोई शक नहीं कि आरोपी पहले से तय इरादे से IPC धारा 376 के अपराध की कोशिश कर रहे थे। कोर्ट ने हाई कोर्ट के नतीजे से असहमति जताई और मूल समन ऑर्डर बहाल कर दिया। ट्रायल अब रेप की कोशिश के कड़े आरोपों पर चलेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये प्राथमिक अवलोकन हैं और ट्रायल के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे।यह फैसला POCSO एक्ट के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में मजबूत न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह पीड़ितों की सुरक्षा और न्यायिक संवेदनशीलता को मजबूत करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, फैक्ट्स को देखते हुए कोई शक नहीं कि आरोपी पहले से तय इरादे से IPC धारा 376 के अपराध की कोशिश कर रहे थे। कोर्ट ने हाई कोर्ट के नतीजे से असहमति जताई और मूल समन ऑर्डर बहाल कर दिया। ट्रायल अब रेप की कोशिश के कड़े आरोपों पर चलेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये प्राथमिक अवलोकन हैं और ट्रायल के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे।यह फैसला POCSO एक्ट के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में मजबूत न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह पीड़ितों की सुरक्षा और न्यायिक संवेदनशीलता को मजबूत करता है।
Written By: Kalpana Pandey


