
Sports News: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाला मुकाबला कई मायनों में निर्णायक माना जा रहा है। चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, जिसे चेपॉक के नाम से जाना जाता है, में होने वाले इस मैच पर करोड़ों फैंस की नजरें टिकी हैं। टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा है, क्योंकि जीत से सेमीफाइनल की राह आसान होगी, जबकि हार समीकरण बिगाड़ सकती है।
लेकिन इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले चर्चा सिर्फ खिलाड़ियों और प्लेइंग इलेवन को लेकर नहीं है। इस बार सुर्खियों में है मैदान की तैयारी—खासकर ओस (Dew) से निपटने की रणनीति। रात के मैचों में ओस अक्सर बड़ा फैक्टर बन जाती है। जैसे-जैसे रात बढ़ती है, आउटफील्ड और पिच पर नमी बढ़ती है, जिससे गेंदबाजों के लिए गेंद पकड़ना मुश्किल हो जाता है। स्पिनरों की पकड़ ढीली पड़ सकती है, जबकि बल्लेबाजों को शॉट खेलने में सहूलियत मिलती है। ऐसे में टॉस भी निर्णायक हो जाता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मैदान प्रबंधन ने एक खास अमेरिकी प्रोडक्ट ‘Dew Cure’ का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह एक विशेष केमिकल ट्रीटमेंट है, जिसे आउटफील्ड पर पानी के साथ मिलाकर छिड़का जाता है। इसका उद्देश्य घास की सतह पर जमा होने वाली नमी को कम करना और ओस के प्रभाव को नियंत्रित करना है। बताया जा रहा है कि इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल अमेरिका में पेशेवर खेल आयोजनों में भी किया जाता रहा है।
चेपॉक में इस केमिकल का छिड़काव मैच से पहले निर्धारित चरणों में किया गया है। ग्राउंड स्टाफ ने मैच से दो दिन पहले और फिर मुकाबले की सुबह एक बार फिर इसका इस्तेमाल किया, ताकि रात के समय ओस का असर कम से कम हो। मैदान अधिकारियों का मानना है कि इससे आउटफील्ड अपेक्षाकृत सूखी रहेगी और दोनों टीमों को संतुलित परिस्थितियां मिलेंगी।
भारतीय टीम ने भी इन हालात को ध्यान में रखते हुए अभ्यास सत्र किया। कप्तान और कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों के साथ संभावित परिस्थितियों पर चर्चा की। स्पिनरों और तेज गेंदबाजों ने अलग-अलग गेंदों के साथ अभ्यास किया, ताकि अगर थोड़ी बहुत नमी रहे भी तो वे उसके अनुसार खुद को ढाल सकें।
जिम्बाब्वे की टीम भी इस मुकाबले को हल्के में लेने वाली नहीं है। टी20 क्रिकेट में उलटफेर आम बात है, और सुपर-8 जैसे चरण में हर टीम पूरी ताकत के साथ उतरती है। भारत के लिए यह जरूरी है कि वह विपक्ष को कमतर न आंके और रणनीति के साथ खेले।
चेपॉक का मैदान पारंपरिक रूप से स्पिनरों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन ओस के कारण यह संतुलन बदल सकता था। ‘Dew Cure’ के इस्तेमाल से आयोजकों की कोशिश है कि मुकाबला कौशल और रणनीति पर तय हो, न कि मौसम की मार पर।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह प्रयोग कितना कारगर साबित होता है। क्या वाकई ओस का असर कम होगा? क्या टॉस का महत्व घटेगा? और सबसे अहम—क्या टीम इंडिया इस ‘करो या मरो’ मुकाबले में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की ओर मजबूती से कदम बढ़ाएगी?
चेपॉक तैयार है, खिलाड़ी तैयार हैं, और फैंस सांसें थामे बैठे हैं। अब देखना है कि मैदान पर असली खेल क्या रंग दिखाता है।



