
नई दिल्ली। देशभर में इन दिनों एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर खूब चर्चा है। राजनीतिक बयानों और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौतों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एसआईआर की प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई थी, जहां करीब 77,895 बीएलओ को इस कार्य में लगाया गया था। वहां समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई, हालांकि उस दौरान भी राजनीतिक विरोध तेज रहा।
बिहार के बाद वर्तमान में 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है, जिनमें लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इस बड़े अभियान में बीएलओ की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन हाल ही में आत्महत्या, ब्रेन हेमरेज और मानसिक दबाव के कारण बीएलओ की मौत की खबरें सामने आने से चिंता बढ़ गई है। दावा किया जा रहा है कि अधिकारियों की ओर से बढ़ते दबाव के कारण बीएलओ ऐसी स्थितियों में पहुंच रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एसआईआर में शामिल सात राज्यों में अब तक 25 बीएलओ की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश से सामने आए हैं, जबकि गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल में भी मौतों की खबरें दर्ज की गई हैं। कई बीएलओ के नौकरी छोड़ने या वेतन रोक दिए जाने की चर्चाएँ भी सामने आई हैं।
कुछ मामलों में बीएलओ ने बताया कि उन्हें टारगेट दिए जाते हैं, और उन्हें समय पर पूरा न करने पर वेतन रोकने की धमकी दी जाती है। कई इलाकों में राजनीतिक कारणों से स्थानीय लोगों के सहयोग न मिलने का भी आरोप है, जिसके चलते बीएलओ मानसिक दबाव में आ रहे हैं। कई राज्यों में बीएलओ पर हमले तक हुए हैं, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने उनकी सुरक्षा की मांग उठाई है।
हालांकि चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है। आयोग का कहना है कि हर मामले की जांच की जा रही है और बीएलओ पर किसी प्रकार का असामान्य दबाव नहीं डाला जा रहा। कई स्थानों पर अधिकारियों ने मौतों के पीछे बीएलओ की निजी स्वास्थ्य समस्याओं को कारण बताया है।
एसआईआर तकनीकी प्रक्रिया
बिहार में बीएलओ के तौर पर काम कर चुके एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दबाव तो रहता है, लेकिन इतना नहीं कि कोई आत्महत्या कर ले। उन्होंने बताया कि एसआईआर तकनीकी प्रक्रिया है और समय पर काम न करने से दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। उनकी मानें तो समयसीमा का पालन सभी स्तरों पर होता है बीएलओ से लेकर डीएम तक।
उधर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर विवाद गहराया है। निर्वाचन आयोग ने राज्य के डीजीपी राजीव कुमार को पत्र लिखकर बीएलओ और निर्वाचन कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनमें स्थानीय कार्यकर्ताओं पर अज्ञात लोगों द्वारा धमकी देने के आरोप लगे थे।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के चलते 40 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ल मिलाकर, एसआईआर की प्रक्रिया के बीच बीएलओ की मौतें और दबाव के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा, लेकिन इतना तय है कि जमीनी स्तर के इन अधिकारियों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर सरकार व आयोग को ज्यादा संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।



