
Singrauli News: सिंगरौली जिले में रेत के अवैध उत्खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि खान अधिकारी आकांक्षा पटेल के कथित संरक्षण में रेत माफिया सरकार ग्लोबल न सिर्फ कानून, बल्कि पर्यावरणीय मानकों को भी खुली चुनौती दे रहे हैं। जिले की विभिन्न नदियों के बीचों-बीच पोकलेन उतारकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, दिन-रात चल रहे उत्खनन से नदी की धारा प्रभावित हो रही है, जलस्तर में गिरावट आ रही है और आसपास के गांवों में कटाव का खतरा बढ सकता है। नियमों के अनुसार नदी तल से सीमित मात्रा में, तय समय और तय स्थान पर ही खनन की अनुमति होती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट बताई जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि कई बार शिकायतों और छापेमारी के बावजूद कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। मशीनें कुछ समय के लिए हटाई जाती हैं और बाद में फिर से वही सिलसिला शुरू हो जाता है। इससे प्रशासनिक मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन के कारण खेती, पेयजल स्रोत और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ रहा है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई स्पष्ट और सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
माफियाओं ने अपनी हवस बुझाने के लिए नदी की मुख्य जलधारा को ही मोड़ दिया जारहा है।हाल ही में वायरल हुई GPS लोकेशन वाली कई तस्वीर, वीडियो तस्वीरों ने प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। इन तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि नदी के बीचों-बीच पोकलैंड मशीनें उतरी हुई हैं। नियमतः पानी के भीतर से या जलधारा को बाधित कर बालू निकाला जारहा जल धारा के बीच मशीन उतार कर बालू निकालना संगीन अपराध है, लेकिन सिंगरौली जिले में ‘कानून के हाथ’ माफियाओं की पहुंच से छोटे नजर आ रहे हैं।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, माफियाओं ने नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ शुरू कर दी है। पानी के भीतर से बालू निकालने के लिए बनाए गए कृत्रिम रास्तों के कारण नदी का पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह नष्ट हो रहा है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस कथित गठजोड़ की निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर सिंगरौली की नदियां यूं ही रेत माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेंगी?
संजय द्विवेदी यूनाइटेड भारत



