
पूर्व भारतीय क्रिकेटर Shikhar Dhawan को दिल्ली की फैमिली कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी को 5.7 करोड़ रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। यह ब्याज उस तारीख से लागू होगा, जब धवन ने संबंधित मुकदमा दायर किया था।
पटियाला हाउस कोर्ट के जज देवेंद्र गर्ग ने अपने फैसले में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में हुआ प्रॉपर्टी सेटलमेंट दबाव, धोखाधड़ी और धमकी के आधार पर किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने उस सेटलमेंट से जुड़े दस्तावेजों को रद्द कर दिया। साथ ही 2024 में ऑस्ट्रेलियाई अदालत द्वारा पारित आदेशों के भारत में क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी गई है।
ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने पहले वैश्विक संपत्तियों के बंटवारे में आयशा मुखर्जी को एसेट पूल का 15 प्रतिशत हिस्सा देने का आदेश दिया था। इसमें करोड़ों रुपये की राशि और एक संपत्ति का ट्रांसफर भी शामिल था। हालांकि दिल्ली की अदालत ने साफ किया कि धवन इन विदेशी आदेशों से भारत में बाध्य नहीं होंगे।
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मामले की सुनवाई के दौरान Shikhar Dhawan ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही उन्हें करियर और छवि खराब करने की धमकियां दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि कई संपत्तियां उन्होंने अपनी कमाई से खरीदीं, लेकिन दबाव में उन्हें संयुक्त नाम या आयशा के नाम पर दर्ज कराना पड़ा। एक संपत्ति में तो 99 प्रतिशत हिस्सेदारी आयशा के नाम दर्शाई गई थी।
धवन और आयशा का तलाक 2023 में हुआ था। अदालत ने माना था कि बेटे जोरावर से लंबे समय तक दूर रहने के कारण धवन को मानसिक पीड़ा हुई। हालांकि उन्हें स्थायी कस्टडी नहीं मिली, लेकिन भारत और ऑस्ट्रेलिया में मुलाकात और वीडियो कॉल की अनुमति दी गई थी। बाद में धवन ने यह भी कहा कि उन्हें बेटे से संपर्क करने में दिक्कतें आईं।
यह फैसला Shikhar Dhawan के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल वित्तीय राहत मिली है बल्कि विदेशी अदालत के आदेशों को लेकर भी स्पष्टता आई है। मामला अब कानूनी और पारिवारिक दोनों दृष्टि से काफी चर्चित हो गया है।



