
Shankaracharya Controversy: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना लगातार चर्चा में बना हुआ है। वह पिछले छह दिनों से संगम क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं और हिंदू धर्म की परंपराओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर प्रशासन और समाज को चेताने का काम कर रहे हैं।
शंकराचार्य का कहना है कि कुछ शक्तियां सनातन धर्म की मूल परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू धर्म में जबरन ऐसी व्यवस्थाएं लाई जा रही हैं जो इसकी आत्मा और परंपरा के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, जिस तरह मुस्लिम समाज में ‘खलीफा’ की परंपरा है, उसी तरह की संरचना को हिंदू धर्म में थोपने की कोशिश हो रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘कालनेमि’ शब्द के प्रयोग पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कालनेमि वह राक्षस है जो साधु का वेश धारण कर समाज और गोवंश को नुकसान पहुंचाता है। उनके मुताबिक, आज भी ऐसे लोग हैं जो धर्म के नाम पर गलत काम कर रहे हैं और सनातन को भीतर से कमजोर कर रहे हैं।
गंगा स्नान की परंपरा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्नान श्रद्धा और सम्मान से जुड़ा होता है, अपमान की स्थिति में स्नान का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक प्रशासन अपने व्यवहार को लेकर क्षमा नहीं मांगता, तब तक उनके लिए स्नान करना उचित नहीं है।
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संत समाज में दो गुटों में बंटने के सवाल पर शंकराचार्य ने इसे राजनीति की शैली बताया। उन्होंने कहा कि साधु समाज में संख्या नहीं, बल्कि शास्त्र और धर्मसम्मत विचारों को महत्व दिया जाता है।
माघ मेले के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए उन्होंने मुगलों के समय के जजिया कर का उदाहरण दिया और कहा कि तब शंकराचार्य ने हिंदुओं के साथ खड़े होकर स्नान किया था। आज उसी परंपरा का अपमान हो रहा है, जो दुखद है।
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन उनकी पालकी को पुलिस द्वारा रोके जाने और शिष्यों की गिरफ्तारी के बाद से ही वह धरने पर बैठे हैं। इस दौरान उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है और उन्हें तेज बुखार हो गया है, हालांकि डॉक्टरों की सलाह पर वे दवा ले रहे हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह धरना केवल एक व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि सनातन धर्म की गरिमा और उसकी परंपराओं की रक्षा की आवाज बन चुका है। उनके विचार धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गहरी बहस को जन्म दे रहे हैं।



