
SP MLA Vijay Singh Gond: जनपद की राजनीति के महत्वपूर्ण स्तम्भ और आदिवासियो के अधिकार को लेकर लम्बी लड़ाई लड़ते रहने वाले सूबे की आखिरी विधानसभा 403 विधानसभा दुद्धी सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड का गुरुवार को लखनऊ पीजीआई में निधन हो गया। वह लम्बे समय से गम्भीर बीमारी से जूझ रहे थे जिसके इलाज लखनऊ में ही एसजीपीजीआई में चल रहा था। विधायक के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओ ने शोक संवेदना प्रकट किया और उनके निधन को आदिवासी समाज व सोनभद्र के लिए अपूर्णिय क्षति बताया है। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को कनहर नदी के घाट पर उनका दाह संस्कार किया जाएगा।
जनपद में दुद्धी विधानसभा सीट की बात करे तो विजय सिंह गोंड निर्दल व अलग-अलग दलो से कुल सात बार लगातार सहित कुल आठ बार विधायक रहे,इसके साथ ही वर्ष 2012 के विधानसभा में अपने दम पर एक निर्दल महिला प्रत्याशी को जीता कर जनपद में पहली बार किसी महिला को विधानसभा में पहुंचाया था। विजय सिंह गोंड को आदिवासी समाज का रहनुमा कहा जाता है।
सूबे की अंतिम सीट पर अपनी हनक से चुनाव जीतने और जिताने वाले आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड का कब्जा रहा है। वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे विजय सिंह गोंड ने फिर कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा और सूबे में 27 साल तक लगातार सात बार चुनाव जीतने वाले प्रमोद तिवारी के साथ संयुक्त रूप से अजेय विधायक का खिताब भी हासिल किया। अपने राजनैतिक जीवन में कभी भी आदिवासी हितों के मुद्दे पर समझौता न करने के कारण विजय सिंह ने सभी राजनैतिक दलो का दामन पकड़ा और छोड़ा लेकिन अन्तिम सांस समाजवादी पार्टी के झंडे से लिपट कर लिया।
बताते चले कि वर्ष 2002 में सपा की साइकिल पर बैठकर चुनाव जीतने वाले एकमात्र आदिवासी नेता को 2003 की मुलायम सरकार में लाल बत्ती भी मिली, लेकिन परिसीमन के चलते 2012 में दुद्धी सीट अनुसूचित के लिए आरक्षित हो जाने के कारण विजय सिंह गोंड का विजय अभियान थम गया। इलाके में अपनी धाक रखने वाले विजय सिंह गोंड ने अपना दबदबा बनाये रखने के लिये रूबी प्रसाद को निर्दल प्रत्याशी के रूप में लड़ा कर अपना आशीर्वाद दिया और जीवन में किसी भी प्रकार का चुनाव न लड़ने वाली रूबी प्रसाद ने पहली बार चुनाव जीता और सपा के रामनरेश पासवान को हराकर विधानसभा सदस्य बन इतिहास रच दिया। वही चुनाव जीतने के बाद विजय सिंह गोंड का साथ छोड़ रूबी प्रसाद ने वर्ष 2019 लोकसभा के चुनाव के पहले सपा का हाथ थाम लिया।
दुद्धी इलाके में पिछले 47 सालों से बन रही बहुप्रतीक्षित कनहर बांध व सिंचाई परियोजना से भारी संख्या में विस्थापित हो रहे आदिवासी समुदाय की लड़ाई विजय सिंह गोंड ने लड़ा और इसके लिए उन्होंने कई राजनीतिक दलों का दामन पकड़ते और छोड़ते रहे है।
विजय सिंह गोंड का राजनीति सफर :- वर्ष 1980 – कांग्रेस (पहली बार विधायक बने)
वर्ष 1985 – कांग्रेस (दूसरी बार विधायक बने)
वर्ष 1989 – निर्दल (तीसरी बार विधायक बने)
वर्ष 1991 – जनता दल (चौथी बार विधायक बने)
वर्ष 1993 – जनता दल (पांचवी बार विधायक बने)
वर्ष 1996 – समाजवादी पार्टी (छठी बार विधायक बने)
वर्ष 2002 – समाजवादी पार्टी (सांतवी बार विधायक बने)
वर्ष 2024 (उप चुनाव) – समाजवादी पार्टी (आठवीं बार विधायक बने)
रिपोर्ट – रवि पाण्डेय
सोनभद्र



