
Business News: अगर आपने भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश किया है, तो आपके लिए अहम खबर है। Reserve Bank of India (RBI) ने अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन (समय से पहले भुनाने) का कैलेंडर जारी किया है। इस दौरान कुल 33 सीरीज ऐसी हैं, जिनके निवेशक 5 साल का लॉक-इन पूरा होने के बाद अपना पैसा निकाल सकते हैं।
क्या है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन का नियम?
SGB की कुल अवधि 8 साल होती है। हालांकि निवेशक 5 साल पूरे होने के बाद, ब्याज भुगतान की तय तारीखों पर, समय से पहले बॉन्ड भुना सकते हैं। RBI हर साल पात्र सीरीज के लिए रिडेम्प्शन की तारीखें जारी करता है।
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 2018-19, 2019-20, 2020-21 और 2021-22 में जारी कुछ ट्रांचेज इस सुविधा के लिए पात्र होंगी। हर सीरीज के लिए अलग-अलग आवेदन विंडो तय की गई है, इसलिए निवेशकों को अपनी सीरीज की तारीखें नोट करना जरूरी है।
पैसा कैसे मिलेगा?
रिडेम्प्शन के समय गोल्ड की औसत बाजार कीमत के आधार पर भुगतान किया जाता है। आमतौर पर भारतीय बुलियन बाजार की पिछले तीन कार्य दिवसों की औसत कीमत को आधार बनाया जाता है। राशि सीधे निवेशक के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
टैक्स से जुड़ी अहम बात
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अगर आप SGB को पूरा 8 साल (मेच्योरिटी) तक होल्ड करते हैं, तो अंतिम लाभ पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता।
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लेकिन यदि आप 5 साल बाद प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन करते हैं, तो आपको कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है।
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सेकेंडरी मार्केट में बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह मौका?
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जिन निवेशकों को लिक्विडिटी की जरूरत है, वे 5 साल बाद पैसा निकाल सकते हैं।
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अगर गोल्ड की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, तो लाभ बुक करने का यह सही समय हो सकता है।
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टैक्स नियमों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाना जरूरी है।
आवेदन कैसे करें?
निवेशक अपने बैंक, अधिकृत एजेंसी या डिपॉजिटरी (NSDL/CDSL) के माध्यम से रिडेम्प्शन अनुरोध दे सकते हैं। आवेदन केवल निर्धारित विंडो के दौरान ही स्वीकार किया जाएगा।
SGB निवेशकों के लिए अगले 6 महीने महत्वपूर्ण हैं। 33 सीरीज को भुनाने का मौका मिलेगा, लेकिन तारीखें और टैक्स नियम समझकर ही फैसला लेना समझदारी होगी। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो 8 साल तक रुकना टैक्स के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकता है।



