
Dollar vs Rupee: भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सतर्क हो गया है। केंद्रीय बैंक ने देश के बैंकों से विदेशी मुद्रा से जुड़े बड़े लेनदेन और क्लाइंट पोजीशन की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं बड़े स्तर पर रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी तो नहीं हो रही।
पिछले छह महीनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में रहा है। एक समय 88 रुपये प्रति डॉलर के आसपास रहने वाली भारतीय मुद्रा गिरकर करीब 92 रुपये तक पहुंच गई थी। हाल ही में यह 91.74 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के कारक रुपये पर दबाव बना रहे हैं।
आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे स्पॉट, फॉरवर्ड और ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में होने वाले क्लाइंट ट्रांजेक्शन की विस्तृत जानकारी साझा करें। खास तौर पर 10 मिलियन डॉलर से बड़े सौदों के मामले में ग्राहक का नाम और डॉलर खरीदने या बेचने का उद्देश्य बताना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बैंकों को अपनी ओपन पोजीशन और इंटर-बैंक मार्केट में कुल खरीद-बिक्री की स्थिति भी रिपोर्ट करनी होगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस डेटा से आरबीआई को बाजार की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी और जरूरत पड़ने पर वह रुपये में अधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा सकेगा। एक वरिष्ठ बैंकर के अनुसार जब केंद्रीय बैंक इस तरह की जानकारी मांगता है तो बाजार में यह संकेत भी जाता है कि सट्टेबाजी पर नजर रखी जा रही है।
रुपये पर दबाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, चालू खाते का घाटा और विदेशी निवेश में कमी शामिल हैं। अगर आने वाले समय में वैश्विक हालात तनावपूर्ण बने रहते हैं और विदेशी निवेश कमजोर रहता है, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
Written By: Kalpana Pandey



