
Randhir Yadav of Prayagraj-22 अगस्त, शाम के करीब पाँच बजे। प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र का मोहम्मदपुर गाँव। गाँव की गलियाँ रोज़ की तरह शांत थीं, लेकिन रणधीर सिंह यादव के आँगन में हलचल थी।
रणधीर-कभी जिला पंचायत सदस्य रहे, समाज में सम्मानित।आज उनकी पत्नी बबली यादव उसी पद पर थीं।गाँव और ज़िले की राजनीति में उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं था।
उस दिन रणधीर नहा-धोकर सफ़ेद कुर्ता-पायजामा पहन तैयार हो रहे थे। बालों पर कंघी फेर ही रहे थे कि बाहर से आवाज़ आई-
“अरे रणधीर भाई… चलना नहीं है क्या?”
आवाज़ उनके पुराने साथी राम सिंह की थी।
रणधीर ने भीतर से ही जवाब दिया-
“हाँ-हाँ, आ रहा हूँ।”
पत्नी बबली ने दरवाज़े से झाँककर पूछा-
“कहाँ जा रहे हैं? कुछ चाहिए हो तो बोलिए।”
रणधीर मुस्कराए, आवाज़ धीमी की-
“बिट्टू की माँ… बस थोड़ी देर में लौट आऊँगा। बाबा फिकर न करें।”
बबली ने भी हँसते हुए सिर हिला दिया।
कुछ ही देर बाद स्कॉर्पियो का इंजन गरजा और गाड़ी गाँव की चौखट पार कर गई।
किसी ने नहीं सोचा था कि यही रणधीर का आख़िरी सफ़र होगा।
लापता होने की ख़बर
रात दस बजे तक रणधीर घर नहीं लौटे.
बबली बेचैन होकर फोन मिलातीं, लेकिन हर बार वही मैसेज-
“यह नंबर फिलहाल स्विच ऑफ है।”
रात गहरी होती गई।
आँगन में बैठी बबली की नज़र बार-बार दरवाज़े पर टिकती।
पर दरवाज़ा खुला नहीं।
सुबह होते ही पूरा परिवार नवाबगंज थाने पहुँचा।
गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी गई।
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी खंगालना शुरू किया।
एक फुटेज मिला—रणधीर की स्कॉर्पियो सड़क किनारे ढाबे पर खड़ी दिखी।
लेकिन उसके बाद गाड़ी कहीं और चली गई।
24 घंटे बाद एक और खबर आई जिसने सबको चौंका दिया।
चित्रकूट के कर्वी थाना क्षेत्र में वही स्कॉर्पियो लावारिस हालत में बरामद हुई।
शक की सुई अपने दोस्तों पर
25 अगस्त को पुलिस ने सीधा सवाल किया-
“किस पर शक है?”
बबली ने बिना झिझक दो नाम लिए-
“राम सिंह और उदय यादव।”
राम सिंह वही था जिसने रणधीर को बुलाया था।
और उदय, उनका पुराना मित्र।
दोस्ती से दुश्मनी तक
पुलिस की जाँच में परतें खुलती गईं।
कुछ महीने पहले रणधीर, उदय और उदय की पत्नी अंजलि नैनीताल घूमने गए थे।
होटल में एक ही कमरा लिया गया।
एक दिन उदय कमरे से बाहर गया और लौटकर देखा-
पत्नी अंजलि, रणधीर के साथ आपत्तिजनक हालत में थी।
ग़ुस्से से काँपते उदय ने वहीं कहा-
“अब समझा… एक ही कमरा क्यों लिया था तुम लोगों ने।”
घर लौटकर उसने पत्नी अंजलि को मायके भेज दिया।
“तूने मेरी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी।”
11 जुलाई को अंजलि की मौत हो गई।
परिवार ने चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया।
लेकिन उदय का ग़ुस्सा शांत नहीं हुआ।
उसने मन ही मन ठान लिया-
“इस बेज्ज़ती का जिम्मेदार रणधीर है। अब इसे ज़िंदा नहीं छोड़ूँगा।”
साजिश और हत्या
उदय ने अपने भाई विजय, दोस्त राम सिंह और सास लीला यादव को शामिल किया।
योजना बनी-रणधीर को जाल में फँसाकर खत्म करना होगा।
22 अगस्त की शाम राम सिंह रणधीर को स्कॉर्पियो में लेकर निकला।
गाड़ी में शराब खोली गई।
रणधीर को बार-बार पिलाया गया।
जैसे ही वह नशे में बेसुध हुए, उदय और बाकी साथी गाड़ी में चढ़े।
सुनसान सड़क पर गाड़ी रोकी गई।
रणधीर ने आखिरी बार कहा-
“क्या कर रहे हो तुम लोग…?”
लेकिन अगले ही पल चारों ने मिलकर उनका गला दबा दिया।
कुछ ही मिनटों में रणधीर की साँसें थम गईं।
सबूत मिटाने की कोशिश
अब सवाल था—शव का क्या करें?
50 हज़ार रुपये देकर सुपारी दी गई विजय पासी को।
शव को बमरौली ले जाया गया।
पहले पत्थरों से कुचलकर पहचान मिटाई गई।
फिर शव को रेलवे ट्रैक पर लिटा दिया गया।
कुछ देर बाद ट्रेन गुज़री और रणधीर का शरीर टुकड़ों में बिखर गया।
पुलिस ने शव बरामद किया, 72 घंटे मोर्चरी में रखा।
पहचान न होने पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सच सामने आया
28 अगस्त की शाम पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
खुलासा हुआ-
वही शव रणधीर सिंह यादव का था।
राम सिंह, लीला यादव और सुपारी किलर विजय पासी गिरफ्तार हुए।
लीला ने बिना झिझक कहा-
“हाँ, हमने ही हत्या कराई। उसने मेरी बेटी की ज़िंदगी बर्बाद कर दी थी। मुझे कोई अफसोस नहीं।”
लेकिन उदय यादव और उसका भाई विजय अब भी फ़रार हैं।
पुलिस लगातार तलाश कर रही है।
अधूरी दास्तान
मोहम्मदपुर गाँव आज भी सन्नाटे में है।
रणधीर की पत्नी बबली हर आने-जाने वाले से पूछती हैं-
“अगर राजनीति और रसूख वाले का ये हाल है, तो आम आदमी की रक्षा कौन करेगा?”
गाँव के बुज़ुर्ग कहते हैं-
“दोस्ती, इज्ज़त और धोखा… जब ये तीन मिलते हैं, तो इंसान इंसान नहीं रहता। वह जलता हुआ अंगार बन जाता है।”
रणधीर की मौत सिर्फ़ एक हत्या नहीं, बल्कि दोस्ती, विश्वास और बदले की ऐसी कहानी बन गई, जो आने वाले सालों तक याद रखी जाएगी।
Randhir Yadav of Prayagraj-Read Also-Sonbhadra News-सोनभद्र के किसानों ने स्ट्राबेरी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन से बनाई नई पहचान : मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
रिपोर्ट: राजेश मिश्रा प्रयागराज