Political News: राजस्थान में ‘चार बच्चे’ बयान पर सियासी घमासान, धर्म और जनसंख्या पर तेज हुई बहस

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील पर डोटासरा का पलटवार, चुनावी माहौल में गरमाई राजनीति

Political News: राजस्थान की राजनीति में ‘धर्म और जनसंख्या’ का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू समाज से “चार बच्चे पैदा करने” की अपील की थी। उनके इस बयान को लेकर जहां समर्थक इसे धार्मिक और सांस्कृतिक संरक्षण से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार दिया है।

क्या कहा था धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज को अपनी जनसंख्या को लेकर सजग रहने की जरूरत है और परिवारों को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने इसे “धर्म रक्षा” और “संस्कृति संरक्षण” से जोड़ा। उनका तर्क था कि संख्या बल समाज की मजबूती का आधार है। हालांकि, इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई कि क्या इस तरह की सार्वजनिक अपीलें समाज में संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं या विवाद को जन्म देती हैं।

डोटासरा का तीखा पलटवार

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं अविवाहित है, उसे समाज को इस तरह की सलाह देने से पहले जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि देश पहले ही बेरोजगारी, महंगाई और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में चार बच्चे पैदा करने की सलाह देना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या नीति सरकारों और विशेषज्ञों द्वारा तय की जाती है, न कि धार्मिक मंचों से। डोटासरा के अनुसार, ऐसे बयान सामाजिक समरसता को प्रभावित कर सकते हैं और अनावश्यक ध्रुवीकरण पैदा कर सकते हैं।

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राजनीतिक पृष्ठभूमि और चुनावी संदर्भ

राजस्थान में आगामी चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धर्म और जनसंख्या जैसे मुद्दे अक्सर चुनावी रणनीति का हिस्सा बनते हैं। ऐसे बयान समर्थक वर्ग को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन साथ ही विरोध और बहस को भी जन्म देते हैं।

बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले भी धर्म से जुड़े मुद्दों पर टकराव होता रहा है। ऐसे में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सियासी बहस को और तेज कर सकता है।

सामाजिक और आर्थिक पहलू

भारत जैसे देश में जहां जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे नीति-निर्माण के केंद्र में हैं, वहां बड़ी संख्या में बच्चों की अपील को लेकर विशेषज्ञों की अलग राय है। कई अर्थशास्त्री और समाजशास्त्री मानते हैं कि परिवार नियोजन और संसाधनों का संतुलित उपयोग ही दीर्घकालिक विकास का आधार है।

सरकारें समय-समय पर परिवार नियोजन और जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर अभियान चलाती रही हैं। ऐसे में धार्मिक या राजनीतिक बयान नीति से अलग दिशा में बहस को मोड़ सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल, बयान और पलटवार के बीच सियासत गरमा चुकी है। सोशल मीडिया पर भी समर्थक और विरोधी आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या चुनावी विमर्श का बड़ा मुद्दा बनता है।

एक बात साफ है—धर्म, जनसंख्या और राजनीति का यह संगम राजस्थान की सियासत में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

Written By: Anushri Yadav
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