
New Delhi. नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष लंबा चलता है, तो इसके गंभीर वैश्विक और राष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने इसे भारत के लिए बड़ी परीक्षा बताते हुए केंद्र और राज्यों से ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के फंसने से भारत की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे पेट्रोलियम, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने सात एम्पॉवर्ड ग्रुप बनाए हैं, जो महंगाई, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं पर नजर रखेंगे।
उन्होंने राज्य सरकारों से गरीबों और श्रमिकों के हितों की रक्षा करने, जमाखोरी पर कार्रवाई करने और योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही किसानों को भरोसा दिलाया कि बुआई सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है।
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार की कूटनीतिक नीति स्पष्ट नहीं है और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ठोस रणनीति की जरूरत है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि संकट के बीच भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।



