
National News: मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। United States और Iran के बीच हुए सीजफायर के कुछ ही समय बाद घटनाओं ने नया मोड़ ले लिया है। Israel द्वारा लेबनान में तेज हमलों और उसके जवाब में ईरान की सख्त प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र को फिर से अस्थिर कर दिया है। इस बीच Pakistan की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं और भारतीय राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल
सीजफायर के बाद जिस तरह से हालात बिगड़े, उसने पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता पर संदेह खड़ा कर दिया। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर किसी देश की मध्यस्थता के बाद भी हालात इतने जल्दी बिगड़ जाएं, तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी संदर्भ में शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की क्षमता उतनी ही है, जितनी उसकी अपने देश में आतंकवाद खत्म करने की क्षमता। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और बहस का विषय बन गया।
अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर तीखी टिप्पणी
प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर है, उसी तरह उसकी कूटनीतिक क्षमता भी कमजोर दिखाई देती है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया, जो भारत की कूटनीति पर सवाल उठा रहे थे। उनके मुताबिक, हर संघर्ष में सीधे कूदना ही कूटनीति नहीं होती, बल्कि सही समय पर संतुलित भूमिका निभाना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
भारत की नीति क्यों बन रही चर्चा का केंद्र?
इस पूरे घटनाक्रम में India की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। भारत ने हमेशा की तरह इस बार भी सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी, लेकिन सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रखा।
विदेश मंत्री S. Jaishankar की कूटनीतिक रणनीति की भी तारीफ हो रही है। उनका यह रुख कि भारत बिना जरूरत किसी विवाद में पक्ष नहीं लेता, बल्कि संवाद के जरिए समाधान का समर्थन करता है—अब सही साबित होता नजर आ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा
इसी बीच, लेबनान में इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। Islamic Revolutionary Guard Corps से जुड़े संकेतों के मुताबिक, तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है।
क्षेत्रीय संगठनों की चेतावनी
लेबनान में सक्रिय संगठन Hezbollah ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर मौजूदा सीजफायर में लेबनान को शामिल नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने इजरायल को हमले जारी रखने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
कूटनीति बनाम दावे
मध्य पूर्व के इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि सिर्फ दावे करने से कोई देश प्रभावशाली मध्यस्थ नहीं बन जाता। विश्वसनीयता, संतुलन और स्थिरता—ये तीनों तत्व किसी भी कूटनीति की असली ताकत होते हैं।
जहां पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं भारत की शांत और संतुलित नीति उसे एक भरोसेमंद वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या हालात संभलते हैं या फिर यह तनाव और गहराता है।
Written By: Anushri Yadav



