
Global Politics News: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक मंच से चीन और रूस को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका के हितों, उसकी सीमाओं और वैश्विक प्रभाव को चुनौती देने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा— “यह हमारा क्षेत्र है, यहां किसी की दादागिरी नहीं चलेगी। चीन और रूस को अपनी हद में रहना होगा।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर ताइवान, यूक्रेन युद्ध, दक्षिण चीन सागर और नाटो विस्तार जैसे मुद्दों पर तीनों महाशक्तियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति दोहराई
अपने संबोधन में ट्रंप ने एक बार फिर “अमेरिका फर्स्ट” नीति को दोहराते हुए कहा कि यदि अमेरिका कमजोर नेतृत्व के हाथों में रहा तो चीन और रूस जैसे देश दुनिया पर दबदबा बनाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने अपनी सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था, जिसकी वजह से वैश्विक शक्तियां सीमा में रहीं।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके शासनकाल में चीन ने व्यापारिक मोर्चे पर मनमानी करने की हिम्मत नहीं की और रूस ने भी सीधे टकराव से परहेज किया। उन्होंने वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि “कमजोर नीतियों के कारण आज दुनिया में अस्थिरता बढ़ी है।”
चीन और रूस की बढ़ती साझेदारी पर चिंता
ट्रंप ने चीन और रूस की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश अमेरिका और उसके सहयोगियों को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका किसी भी तरह की साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों— नाटो, यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र— के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और किसी भी आक्रामक कदम का जवाब ताकत से दिया जाएगा।
वैश्विक राजनीति में बढ़ी हलचल
ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी अमेरिकी चुनावों को देखते हुए ट्रंप की सख्त विदेश नीति की झलक है। साथ ही यह संदेश भी है कि यदि वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो चीन और रूस के प्रति अमेरिका का रुख और अधिक सख्त हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह तेवर वैश्विक मंच पर शक्ति संतुलन और कूटनीतिक रिश्तों को एक नई दिशा दे सकता है।



