
New Labour Code. नए श्रम कानूनों (New Labour Code) को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति अब काफी हद तक साफ हो गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने चारों लेबर कोड्स के तहत ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक कर दिया है और 30 से 45 दिनों के भीतर कर्मचारियों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार ने 28 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं – वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता (2020)। ये नियम 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माने जा रहे हैं और 2026 में इनके पूर्ण रूप से लागू होने की संभावना है।
सैलरी की गणना कैसे होगी
ड्राफ्ट वेतन संहिता नियम, 2025 के अनुसार न्यूनतम मजदूरी पहले दैनिक आधार पर तय की जाएगी, जिसे एक मानक फॉर्मूले से प्रति घंटा और मासिक वेतन में बदला जाएगा। न्यूनतम वेतन तय करते समय भोजन, कपड़े, किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा जैसी जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र सरकार राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करेगी, जिससे कम कोई राज्य वेतन तय नहीं कर सकेगा।
काम के घंटे और नाइट शिफ्ट
नए नियमों में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम का प्रावधान है और वेतन की गणना 8 घंटे के कार्यदिवस के आधार पर होगी। महिलाओं को सुरक्षा और सहमति के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, जो मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए अहम है।
सैलरी भुगतान और कटौती पर सीमा
कर्मचारियों को समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा। किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौती वेतन के 50% से अधिक नहीं हो सकती। बेसिक पे, डीए और अन्य भत्ते कुल सैलरी का अधिकतम 50% होंगे। तय सीमा से अधिक अलाउंस स्वतः वेतन में जुड़ जाएगा।
ग्रेच्युटी और सोशल सिक्योरिटी
फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को अब एक साल की सेवा पर ही ग्रेच्युटी मिलेगी। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार PF, बीमा और पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे।
ड्राफ्ट नियमों में वेतन भेदभाव, लेट सैलरी और कम भुगतान के खिलाफ शिकायत और अपील की व्यवस्था भी की गई है।



