
New Delhi News-फ्रांस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक हालात के बीच ग्लोबल साउथ की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन के दबाव और युद्धों के बीच विकासशील देशों की ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक से जुड़ी चुनौतियों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग दोहराई
जयशंकर ने बैठक में स्पष्ट किया कि दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन यूएनएससी (UN Security Council) पुरानी संरचना में ही काम कर रहा है।
उन्होंने आग्रह किया कि-
- वैश्विक शासन में सुधार हो,
- यूएनएससी में अधिक देशों का प्रतिनिधित्व हो,
- और शांति स्थापना अभियानों में आधुनिकरण किया जाए।
ग्लोबल साउथ की आवाज– ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि कई गरीब और विकासशील देश
- महंगे ईंधन,
- उर्वरक की कमी,
- और सप्लाई चेन बाधाओं की वजह से कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
उन्होंने अपील की कि वैश्विक समुदाय इन देशों की जरूरतों को नजरअंदाज न करे।आईएमईसी (India-Middle East-Europe Corridor) पर भारत की बात जी7 बैठक के दूसरे सत्र में जयशंकर ने आईएमईसी पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया।
उन्होंने बताया कि-
- पश्चिम एशिया के संघर्षों ने मजबूत व्यापार मार्गों की जरूरत बढ़ा दी है।
- भारत के यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ईएफटीए देशों के साथ हो रहे एफटीए, आईएमईसी को और उपयोगी बनाते हैं।
उन्होंने इस परियोजना के प्रति मिले समर्थन का स्वागत किया।
द्विपक्षीय बैठकों में भी सक्रिय रहे जयशंकर जी7 बैठक से इतर विदेश मंत्री ने कई नेताओं से मुलाकात की-
- कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से साझेदारी बढ़ाने पर बातचीत हुई।
- फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की।
- इसके अलावा जर्मनी, यूक्रेन और अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी



