
New Delhi News-भारत के वित्तीय सहयोग से म्यांमार में एक दो मंजिला ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास हुआ है, जिसमें देश के नाविकों (सीफेयरर्स) के लिए सिम्युलेटर बेस्ड ट्रेनिंग, असेसमेंट और एग्जाम से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं आसानी से हो सकेंगी।
म्यांमार में भारतीय राजदूत अभय ठाकुर ने स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित भूमि पूजन समारोह (ग्राउंडब्रेकिंग सेरेमनी) में हिस्सा लिया। भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया है, दो मंजिला ट्रेनिंग सेंटर, जो “सीफेयरर्स के लिए सिम्युलेटर बेस्ड ट्रेनिंग, असेसमेंट और एग्जाम सिस्टम” के लिए एक छोटा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (एसडीपी) है, के कंस्ट्रक्शन के लिए ग्राउंडब्रेकिंग सेरेमनी आज यांगून में प्रोजेक्ट साइट पर हुई। दूतावास ने बताया कि कार्यक्रम में भारतीय राजदूत के अलावा यांगून रीजन गवर्नमेंट के चीफ मिनिस्टर यू सोए थीन; ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन्स के डिप्टी मिनिस्टर यू आंग क्याव तुन भी मौजूद रहे।
इस प्रोजेक्ट में सिम्युलेटर-बेस्ड ट्रेनिंग सेंटर के कंस्ट्रक्शन के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट के साथ-साथ यांगून में सीफेयरर्स की ट्रेनिंग के लिए मॉडर्न स्टेट ऑफ द आर्ट डिजिटल सिम्युलेटर लगाने का प्लान है।
बयान में कहा गया है एसडीपी को लागू करने के लिए इंडियन ग्रांट असिस्टेंस के लिए फ्रेमवर्क एमओयू पर असल में जुलाई 2010 में साइन किया गया था और यह जुलाई 2030 तक वैध है। इस सहयोग के तहत, भारत सरकार ने अलग-अलग एसडीपी प्रोजेक्ट्स को मदद दी है, जैसे कि सागाइंग इलाके के मोन्यवा में 500 बेड वाला हॉस्पिटल, रखाइन स्टेट में कंप्यूटर और एग्रो-मशीनरी की सप्लाई और म्यांमार के कई राज्यों और इलाकों में होम साइंस स्कूलों को मदद।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत जरूरतमंद मित्र पड़ोसी देशों की मदद के लिए हमेशा अग्रसर रहता है। भारत सरकार अपने स्मॉल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट इनिशिएटिव के जरिए, जो हर प्रोजेक्ट के लिए 20 लाख डॉलर तक की फंडिंग देता है, होस्ट देश की जरूरतों और प्राथमिकता के आधार पर हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
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रिपोर्ट-शाश्वत तिवारी



