डॉलर की ताकत से दबाव की रणनीति: ईरान में प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका की नीति पर सवाल

New Delhi News-मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव हाल के प्रदर्शनों के बाद फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्लेषकों का दावा है कि आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय दबाव की रणनीति के जरिए वॉशिंगटन ने तेहरान पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश की।

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों का मुख्य आधार डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय प्रणाली थी, जिसके कारण ईरान के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बैंकिंग चैनलों पर असर पड़ा। जानकार इसे “डॉलर को कूटनीतिक हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने की नीति बताते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ता है तो उसका असर आम जनता पर पड़ता है, जिससे असंतोष और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे अन्य देशों के लिए चेतावनी के रूप में देख रहे हैं कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता राजनीतिक दबाव का माध्यम बन सकती है।

हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग राय भी सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदर्शनों के पीछे घरेलू कारण ज्यादा अहम होते हैं और बाहरी दबाव केवल स्थिति को प्रभावित करता है, सीधे तौर पर उसे पैदा नहीं करता।

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