New Delhi:पर्यावरण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, यह साझा जिम्मेदारी है: रेखा गुप्ता

New Delhi:दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करते हुए कहा कि पर्यावरण सरकार के लिए कोई राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है, जिससे प्रत्येक नागरिक और परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मुखिया होने के नाते वे अपनी जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से महसूस करती हैं और इसलिए उनकी सरकार न तो विपक्षी दलों पर और न ही पड़ोसी राज्यों पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने में विश्वास करती है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर विषय पर केवल दिखावटी और अस्थायी कदम उठाए गए तथा मीडिया के सामने प्रतीकात्मक विरोध कर जनता को गुमराह किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने कार्यकाल में भी और वर्तमान में भी जनता को भ्रमित करने का यही तरीका अपनाया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना सरकार की प्रतिबद्धता और संकल्प है, लेकिन इसके लिए स्थायी और जमीनी उपाय आवश्यक हैं।

प्रदूषण के आंकड़े और वास्तविकता

प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 से 2025 तक खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या में कोई ठोस और स्थायी सुधार नहीं हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब तक किए गए उपाय पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने कहा कि कभी स्मॉग टावर, तो कभी रेड लाइट पर इंजन बंद करने जैसे सीमित कदमों को समाधान मान लिया गया, जबकि प्रदूषण मौसम, वाहनों की संख्या, एनसीआर से आने वाली हवाओं और धूल कणों जैसे कई कारकों से जुड़ा विषय है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की समस्या नहीं, बल्कि दिल्ली की भौगोलिक और संरचनात्मक वास्तविकता से जुड़ा मुद्दा है।

इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले दो प्रमुख कारक धूल और धुआं हैं। धुएं को कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दे रही है। अब तक 3,500 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जा चुकी हैं और 2026 के अंत तक 7,500 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य है। इसके बाद 2029 तक दिल्ली का पूरा सार्वजनिक परिवहन इलेक्ट्रिक करने का संकल्प लिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार सभी सरकारी और निजी वाहनों को शून्य उत्सर्जन की दिशा में ले जाना चाहती है। इसके लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी मैनेजमेंट, ई-ऑटो, ई-टैक्सी, साझा टैक्सी सेवाएं और कार पूलिंग को बढ़ावा देने हेतु मोबाइल ऐप्स पर कार्य किया जा रहा है।

वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच

मुख्यमंत्री ने बताया कि नंद नगरी और तेहखंड में दो नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों का शिलान्यास किया गया है तथा बुराड़ी स्थित फिटनेस सेंटर का उन्नयन किया गया है। इन केंद्रों से लगभग 2.5 लाख कमर्शियल वाहनों की स्वचालित जांच संभव होगी। उन्होंने दोहराया कि बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कनेक्टिविटी

स्वच्छ कनेक्टिविटी के लिए 17 मेट्रो स्टेशनों पर साइकिल सेवा और 50 से अधिक मेट्रो स्टेशनों पर ई-बाइक सेवाएं शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन नए मेट्रो कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है और वर्तमान 394 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क को 500 किलोमीटर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।

उन्होंने आरआरटीएस परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली–मेरठ, दिल्ली–पानीपत–करनाल और दिल्ली–अलवर रूट पर रैपिड रेल से ट्रैफिक दबाव कम होगा और प्रदूषण में राहत मिलेगी।

धूल नियंत्रण और सड़क सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक जाम सीधे प्रदूषण बढ़ाता है, इसलिए प्रमुख बॉटलनेक्स, यू-टर्न और डिवाइडर से जुड़ी समस्याओं को ट्रैफिक मैनेजमेंट स्टडी के माध्यम से सुधारा जा रहा है। धूल नियंत्रण के लिए एमसीडी को 70 एमआरएस मशीनें और 1,000 लिटर पिकर दिए गए हैं। इसके साथ ही ₹2,300 करोड़ की सहायता राशि भी प्रदान की गई है।

दिल्ली की सभी सड़कों पर वॉल-टू-वॉल कारपेटिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे धूल और गड्ढा मुक्त सड़कें सुनिश्चित होंगी।

हरियाली और वन क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि पहली बार दिल्ली के इतिहास में रिज एरिया को नोटिफाई किया गया है और अब तक 4,200 हेक्टेयर भूमि को फॉरेस्ट एरिया घोषित किया जा चुका है। मियावाकी जंगल, वर्टिकल प्लांटेशन और फ्लाईओवर व मेट्रो पिलर्स के नीचे हरियाली विकसित की जा रही है। अब पौधारोपण एजेंसियों को पूरे वर्ष पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दी जाएगी।

कचरा, उद्योग और ऊर्जा

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 11,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। कूड़े के पहाड़ वर्षों की लापरवाही का परिणाम हैं, लेकिन वर्तमान सरकार बायोमाइनिंग की क्षमता लगातार बढ़ा रही है। नंगली सकरावती में 200 टीपीडी बायोगैस प्लांट और घोघा डेयरी में 100 टीपीडी वेस्ट-टू-सीबीजी प्लांट शुरू किया गया है।

ई-वेस्ट को भविष्य की गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि ओखला में आधुनिक ई-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है।

जलभराव और सौर ऊर्जा

जलभराव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मिंटो ब्रिज और सुनहरी बाग ड्रेन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते कार्रवाई से इस वर्ष भारी बारिश के बावजूद जलभराव नहीं हुआ। सुनहरी बाग ड्रेन से 15,000 मीट्रिक टन सिल्ट निकाली गई।

थर्मल पावर पर निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी भवनों पर सोलर रूफटॉप, बढ़ी हुई सब्सिडी और कृषि भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की योजनाएं लागू की गई हैं।

विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग अपनी विफलताओं का दोष 11 महीने पुरानी सरकार पर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार फरवरी में बनी, जबकि कई प्रक्रियाएं पूर्व सरकार की थीं।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिन-रात दिल्ली के पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रही है और सरकार व नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से दिल्ली को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त राजधानी बनाया जाएगा।

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