Navratra Special: कुमाऊं के पांच प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहां पूरी होती है हर मनोकामना

Navratra Special: हिन्दू धर्म में माता शक्ति को आदि पंच देवों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। माता शक्ति को देवभूमि उत्तराखंड में मां भगवती के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। देवी शक्ति को पहाड़ों वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर हम आपको कुमाऊं मंडल के पांच प्रसिद्ध देवी मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें चमत्कारी माना जाता है और जहां श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

1. नंदा देवी मंदिर (अल्मोड़ा)

अल्मोड़ा में स्थित नंदा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। यह मंदिर चंद वंश की ईष्ट देवी, मां नंदा देवी को समर्पित है। मां नंदा देवी को बुराइयों का विनाश करने वाली देवी माना जाता है। इस मंदिर का इतिहास 1000 वर्ष से भी अधिक पुराना है और यहां प्रतिवर्ष नंदा देवी महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

2. पूर्णागिरी मंदिर (चम्पावत)

चम्पावत जिले में स्थित मां पूर्णागिरि मंदिर को देवी भगवती के 108 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर काली नदी के दाहिने किनारे पर, टनकपुर से 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह शक्तिपीठ अन्नपूर्णा चोटी के शिखर पर लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं।

3. नैनादेवी मंदिर (नैनीताल)

नैनीताल झील के उत्तरी किनारे पर स्थित नैनादेवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। विशेष रूप से श्रावण अष्टमी और नवरात्रि के समय यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

4. हाट कालीका मंदिर (गंगोलीहाट, पिथौरागढ़)

गंगोलीहाट में स्थित हाट कालीका मंदिर एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है। यह मंदिर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य देवी के रूप में पूजित है। मान्यता है कि माता कालीका रणभूमि में जवानों की रक्षा करती हैं। यह मंदिर भक्तों की हर विपदा को दूर करने वाला माना जाता है। कहते हैं कि माता यहां हर रात विश्राम करती हैं, जिसका प्रमाण हर सुबह मंदिर में बिछाए गए बिस्तर पर पड़ने वाली सिलवटों से मिलता है। इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के मानसखंड में भी मिलता है।

5. कसारदेवी मंदिर (अल्मोड़ा)

अल्मोड़ा में स्थित कसारदेवी मंदिर अपनी असीम शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है। नासा के वैज्ञानिक भी इस स्थान की अद्भुत चुंबकीय ऊर्जा से प्रभावित हुए हैं। यह मंदिर ध्यान और योग के लिए आदर्श स्थल माना जाता है। यहां मां कात्यायनी के प्रकट होने के प्रमाण मौजूद हैं। स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है।

पूर्णागिरी मंदिर समिति के अध्यक्ष किशन तिवारी का कहना है कि ये सभी मंदिर हमारी आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं। देवी मां को पहाड़ों वाली माता के रूप में पूजा जाता है और भगवान शिव की अर्धांगिनी होने के कारण उनका वास भी यहीं माना जाता है। नंदा देवी मंदिर के पुजारी हरीश जोशी का कहना है कि मां भगवती की देवभूमि पर विशेष कृपा है, जिससे वे यहां विभिन्न रूपों में विराजमान हैं।

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नवरात्रि के इस पावन अवसर पर देवी शक्ति के इन दिव्य स्थलों पर दर्शन कर श्रद्धालु अपने जीवन को मंगलमय बना सकते हैं।

 

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