
Mumbai News: महाराष्ट्र में भाषा को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मुंबई से सामने आए एक वीडियो ने तूल पकड़ लिया है, जिसमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का एक नेता बैंक अधिकारी को खुलेआम धमकाता नजर आ रहा है। वीडियो में नेता यह कहते हुए सुना जा सकता है— “अगर महाराष्ट्र में रहना है, तो मराठी सीखनी होगी।”
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह घटना मुंबई के एक बैंक ब्रांच की है, जहां MNS नेता एक बैंक अधिकारी से मराठी में बात न करने को लेकर नाराज हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नेता अधिकारी पर दबाव बनाते हुए कहता है कि महाराष्ट्र में काम करना है तो मराठी भाषा सीखना अनिवार्य है।
बैंक अधिकारी ने अपनी सफाई में कहा कि वह दूसरे राज्य से हैं और फिलहाल मराठी भाषा नहीं जानते, लेकिन हिंदी और अंग्रेज़ी में ग्राहकों से बातचीत कर सकते हैं। इसी बात को लेकर विवाद और ज्यादा बढ़ गया।
Mumbai News: Mumbai News: एक महिला ने शेयर ट्रेडिंग घोटाले में 7 लाख रुपये से अधिक गवाएं पैसे, मामला दर्ज
धमकी और विरोध की चेतावनी
वीडियो में MNS नेता सिर्फ भाषा की बात पर ही नहीं रुका, बल्कि बैंक अधिकारी को ट्रांसफर कराने और बैंक के खिलाफ प्रदर्शन की धमकी भी देता नजर आया। नेता ने कहा कि अगर अधिकारी का रवैया नहीं बदला गया तो पार्टी कार्यकर्ता बैंक के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बैंक में मौजूद ग्राहक भी असहज नजर आए और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
वीडियो वायरल, प्रतिक्रियाओं की बाढ़
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, लोगों की प्रतिक्रियाएं बंट गईं।
-
कुछ लोगों ने मराठी भाषा के सम्मान की बात करते हुए MNS नेता का समर्थन किया।
-
वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे जबरदस्ती और धमकी की राजनीति बताया और बैंक अधिकारी के साथ सहानुभूति जताई।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि सरकारी या निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर किसी खास भाषा को थोपना कितना जायज़ है।
पहले भी उठता रहा है भाषा विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब महाराष्ट्र में भाषा को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी MNS कार्यकर्ता दुकानों, बैंकों और सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा के इस्तेमाल को लेकर विरोध और बहस करते रहे हैं। पार्टी लंबे समय से मराठी अस्मिता और भाषा को लेकर आक्रामक रुख अपनाती रही है।
प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल इस मामले में न तो बैंक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही पुलिस ने किसी कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन पर दबाव जरूर बढ़ गया है।
बड़ा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि
क्या भाषा के नाम पर धमकी और दबाव बनाना सही है, या फिर यह मुद्दा कानून और आपसी सम्मान के दायरे में सुलझाया जाना चाहिए?
महाराष्ट्र में यह भाषा विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है।
Written By: Anushri Yadav



