
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। भोपाल में हुई नेशनल गवर्निंग मीटिंग में उन्होंने कहा कि देश में हालात संवेदनशील हैं और मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, मॉब लिंचिंग, बुलडोज़र कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों की जब्ती और मदरसों के खिलाफ अभियान जैसे कदम समुदाय के उत्पीड़न का हिस्सा हैं।
मदनी ने कहा कि हाल के वर्षों में बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक जैसे फैसलों के बाद यह धारणा बनी है कि अदालतें “सरकारी दबाव” में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी और मथुरा विवादों में प्लेटफ़ॉर्म एक्ट को दरकिनार कर सुनवाई हो रही है, और “सुप्रीम कोर्ट तभी तक सुप्रीम है, जब तक वह संविधान के अनुरूप चलता है।”
जिहाद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “दमन होगा तो जिहाद होगा”, और आरोप लगाया कि देश में “लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद” जैसे शब्द गढ़कर समुदाय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार व मीडिया के कुछ लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर मुस्लिम समाज को ठेस पहुंचा रहे हैं।
मौलाना ने एसआईआर प्रक्रिया पर भी चिंता जताई
मौलाना ने एसआईआर प्रक्रिया पर भी चिंता जताई और कहा कि देश के 60% लोग चुप हैं, जबकि यह मामला भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मदनी के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने कहा कि यह बयान “उकसाने वाला और विभाजनकारी” है। पात्रा ने कहा कि जिहाद शब्द का दुरुपयोग कर दुनिया भर में आतंकवाद फैलाया गया है, इसलिए इस तरह की भाषा समाज को बांटने वाली है।
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