
BMC Election 2026 : महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के नतीजों ने ठाकरे और पवार परिवारों की राजनीति को गहरा झटका दिया है। मुंबई और पुणे जैसे पारंपरिक गढ़ों में चुनावी रुझानों से साफ है कि पारिवारिक सुलह और गठबंधन भी वोटरों का भरोसा जीतने में नाकाम रहे।
मुंबई के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की दो दशक बाद हुई सुलह भी असर नहीं दिखा पाई। रुझानों के मुताबिक, BJP और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना BMC में सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है।
बाल ठाकरे द्वारा स्थापित अविभाजित शिवसेना ने 25 वर्षों तक मुंबई पर राज किया था, लेकिन 2022 में हुए पार्टी विभाजन के बाद से तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शिंदे गुट, जिसे पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिला, अब खुद को बाल ठाकरे की आक्रामक हिंदुत्व राजनीति का असली वारिस बता रहा है।
उद्धव-राज के सामने वैचारिक संकट
राज ठाकरे की MNS ने ‘मराठी मानुष’ और प्रवासी विरोधी राजनीति को फिर से धार देने की कोशिश की, वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने BJP के हिंदुत्व को चुनौती दी। लेकिन नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि मतदाता अब स्पष्ट नेतृत्व और मजबूत संगठन को तरजीह दे रहे हैं। ऐसे में ठाकरे भाइयों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है – आखिर उनकी राजनीति की मुख्य विचारधारा क्या है?
पुणे में पवार परिवार की सियासत कमजोर
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में भी पवार परिवार के लिए हालात उत्साहजनक नहीं हैं। शरद पवार और अजित पवार की NCP के बीच सुलह के बावजूद दोनों गुट सत्ता की दौड़ में काफी पीछे नजर आ रहे हैं।
रुझानों के अनुसार, पुणे में BJP बहुमत की ओर बढ़ रही है, जबकि अजित पवार की NCP और शरद पवार गुट (NCP-SP) दोनों ही सिंगल डिजिट सीटों पर सिमटे हुए हैं। कांग्रेस और ठाकरे गुट का प्रदर्शन भी बेहद कमजोर रहा।
BJP को शहरी महाराष्ट्र में बढ़त
इन नतीजों से साफ है कि शहरी महाराष्ट्र में BJP और उसके सहयोगी लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। वहीं ठाकरे और पवार परिवारों की पारंपरिक राजनीतिक विरासत अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।



